रायपुर – इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि महाविद्यालय, रायपुर में आयोजित विशेष व्याख्यानमाला में उद्यानिकी एवं पुष्पकृषि के क्षेत्र में उभरते अवसरों, आधुनिक तकनीकों और कृषि आधारित उद्यमिता पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वैज्ञानिकों को बताया गया कि आने वाले वर्षों में उद्यानिकी और पुष्पकृषि रोजगार और स्वरोजगार का सबसे बड़ा माध्यम बन सकती है।
यह व्याख्यान इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के मार्गदर्शन तथा कृषि महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे की प्रेरणा से आयोजित किया गया। सेमिनार हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था “उद्यानिकी एवं पुष्पकृषि में उद्यमिता विकास हेतु उभरते रुझान”।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. सुनील कुमार, प्रोफेसर, पुष्पकृषि एवं लैंडस्केपिंग विभाग, कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री (सीएचएफ), पासीघाट, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (इम्फाल), अरुणाचल प्रदेश रहे। उन्होंने अपने व्याख्यान में बताया कि बदलती उपभोक्ता मांग, आधुनिक तकनीकों और वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं ने उद्यानिकी एवं पुष्पकृषि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का अवसर दिया है।
उन्होंने कहा कि पुष्पकृषि आज “सनराइज़ इंडस्ट्री” के रूप में तेजी से विकसित हो रही है। इस क्षेत्र में रोजगार सृजन, मूल्य संवर्धन, निर्यात बढ़ाने और ग्रामीण युवाओं की आय में वृद्धि की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि भविष्य की खेती केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आधुनिक तकनीकों को अपनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
प्रो. सुनील कुमार ने प्रिसिजन फार्मिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित ग्रीनहाउस प्रबंधन, हाइड्रोपोनिक्स, एरोपोनिक्स, वर्टिकल फार्मिंग, संरक्षित खेती, शहरी लैंडस्केपिंग, बायोफोर्टिफिकेशन, डिजिटल मार्केटिंग, ब्रांडिंग, वेस्ट-टू-वेल्थ तकनीक, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट और एग्री-स्टार्टअप जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के माध्यम से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने भारतीय उद्यानिकी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कौशल आधारित शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और तकनीक आधारित उद्यमिता पर विशेष जोर दिया। साथ ही विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल नौकरी की तलाश करने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले सफल कृषि उद्यमी बनने का लक्ष्य रखें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कृषि महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे ने कहा कि ऐसे वैज्ञानिक व्याख्यान विद्यार्थियों और शोधार्थियों को कृषि विज्ञान के नवीनतम अनुसंधानों और तकनीकी विकास से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर ही सतत कृषि विकास और किसानों की आय में वृद्धि का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
व्याख्यानमाला में महाविद्यालय के शिक्षक, वैज्ञानिक, स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थी तथा शोधार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में आयोजित संवादात्मक सत्र में प्रतिभागियों ने उद्यानिकी एवं पुष्पकृषि के उभरते अनुसंधान, व्यवसायीकरण की संभावनाओं और भविष्य की चुनौतियों पर विशेषज्ञों से सवाल-जवाब किए। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
