रायपुर – देश की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत बन रही करीब ₹4,145 करोड़ की 6-लेन एक्सप्रेस-वे सड़क का उद्घाटन तो दूर, आम लोगों के लिए पूरी तरह खोले जाने से पहले ही सड़क करीब 35 मीटर तक बीचों-बीच फट गई। हैरानी की बात यह है कि जिस समय इस हिस्से में दरारें उभर रही थीं, उसी दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के प्रस्तावित ड्राइव टेस्ट की तैयारियां चल रही थीं।
सड़क पर पड़ी लंबी दरारों ने निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और करोड़ों रुपये के खर्च पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क का यह हाल उद्घाटन से पहले है, तो भारी वाहनों का दबाव बढ़ने के बाद स्थिति कितनी गंभीर होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के एनएच-130 सीडी के बसनवाही सेक्शन में यह दरारें सामने आई हैं। सड़क की सतह कई जगह से चटक गई है और करीब 35 मीटर तक लंबी दरार साफ दिखाई दे रही है। तस्वीरें सामने आने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर करोड़ों रुपये की परियोजना में गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर हो रही थी? क्या निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं थी या फिर निर्माण में जल्दबाजी की गई? यदि सड़क अभी से जवाब देने लगी है, तो भविष्य में इसकी मजबूती पर भरोसा कैसे किया जाए?
इस मामले में एनएचएआई परियोजना निदेशक शमशेर सिंह का कहना है कि लगातार भारी बारिश के कारण सड़क के शोल्डर बंद होने से बाहरी लेन पर दबाव बढ़ा और दरारें आ गईं। निर्माण एजेंसी को तत्काल मरम्मत के निर्देश दे दिए गए हैं और फिलहाल सुधार कार्य जारी है। स्थायी मरम्मत बारिश खत्म होने के बाद कराई जाएगी।

हालांकि यह सफाई भी कई सवाल छोड़ जाती है। जानकारों का मानना है कि यदि केवल बारिश से नई सड़क में इतनी बड़ी दरारें आ रही हैं, तो परियोजना की डिजाइन, मिट्टी परीक्षण और निर्माण गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। आखिर ऐसी सड़कें वर्षों तक चलने के लिए बनाई जाती हैं, न कि पहली बारिश में टूटने के लिए।
विपक्षी दलों ने भी इस मामले को लेकर सरकार और निर्माण एजेंसियों पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह केवल एक सड़क का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन और लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सड़क उद्घाटन से पहले ही टूटने लगे, तो जवाबदेही तय होना जरूरी है।
क्या केवल दरार भरकर मामले को शांत कर दिया जाएगा या फिर पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी। क्योंकि सवाल सिर्फ 35 मीटर लंबी दरार का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जिसने ₹4,145 करोड़ की परियोजना को उद्घाटन से पहले ही कटघरे में खड़ा कर दिया है।
