नई दिल्ली – केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। NEET परीक्षा विवाद को लेकर पिछले एक महीने से अधिक समय से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच उनका इस्तीफा देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
प्रदर्शनकारी छात्र और युवा लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। शुक्रवार को केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों और आंदोलनकारियों के बीच हुई वार्ता में भी यह मांग प्रमुखता से उठाई गई। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा था कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे, तब तक जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा।

शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि उन्हें भारत के लोकतंत्र और युवाओं की आवाज पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि देश के छात्रों का भविष्य सर्वोपरि है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर केंद्र सरकार विपक्ष और छात्र संगठनों के निशाने पर रही है। इस मुद्दे को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे।

इस्तीफे के बाद अब केंद्र सरकार के सामने नया शिक्षा मंत्री नियुक्त करने के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने की बड़ी चुनौती होगी। वहीं, छात्र संगठनों ने इसे अपने आंदोलन की बड़ी सफलता बताते हुए परीक्षा सुधार और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग दोहराई है।
