नई दिल्ली – भारत की राजधानी दिल्ली स्थित ऐतिहासिक जंतर-मंतर का भ्रमण करने पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता खूब लाल ध्रुव ने इसे केवल एक ऐतिहासिक स्मारक ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक भारत में जनआवाज़ और शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर की यात्रा ने उन्हें इतिहास, विज्ञान, लोकतंत्र और जनभागीदारी के विभिन्न पहलुओं को नजदीक से समझने का अवसर दिया।
खूब लाल ध्रुव ने बताया कि जंतर-मंतर का निर्माण वर्ष 1724 में महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय के संरक्षण में कराया गया था। इसका उद्देश्य खगोलीय अध्ययन, समय की सटीक गणना तथा ग्रह-नक्षत्रों की वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त करना था। यहां स्थापित विभिन्न खगोलीय यंत्र उस दौर की भारतीय वैज्ञानिक सोच और ज्ञान की समृद्ध परंपरा का प्रमाण हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जंतर-मंतर देशभर के नागरिकों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का प्रमुख केंद्र बन चुका है। वर्षों से यहां विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और जनहित से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और आंदोलन आयोजित होते रहे हैं।
दिल्ली प्रवास के दौरान जंतर-मंतर पहुंचे खूब लाल ध्रुव ने वहां मौजूद युवाओं और विभिन्न संगठनों के आंदोलनों को भी समझने का प्रयास किया। उनका कहना है कि यदि युवाओं की मांगें संविधान और कानून के दायरे में हैं तथा जनहित से जुड़ी हैं, तो सरकार को उन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं और उनकी सकारात्मक ऊर्जा का उपयोग राष्ट्र निर्माण में होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों में युवाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उन्हें भ्रामक सूचनाओं, अफवाहों या असामाजिक तत्वों द्वारा गुमराह न किया जाए। लोकतंत्र में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, किंतु यह हमेशा शांतिपूर्ण, जिम्मेदारीपूर्ण और राष्ट्रहित की भावना के साथ होना चाहिए।
खूब लाल ध्रुव ने कहा कि जंतर-मंतर की इस यात्रा से उन्हें अनेक सकारात्मक संदेश और प्रेरणाएं मिलीं। उनके अनुसार इतिहास की विरासत, वैज्ञानिक सोच, जागरूक नागरिक और मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था मिलकर ही विकसित भारत के निर्माण का आधार बन सकते हैं।
