रायपुर – सड़क दुर्घटनाओं में नाबालिगों की बढ़ती भागीदारी को रोकने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रायपुर यातायात पुलिस का “सुरक्षित विद्यार्थी–सुरक्षित भविष्य” अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। यातायात एवं प्रोटोकॉल डीसीपी डॉ. अर्चना झा के निर्देशन में चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत गुरुवार को शहर के विभिन्न स्कूलों के बाहर कार्रवाई करते हुए 29 नाबालिग वाहन चालकों को पकड़ा गया। इसके साथ ही अभियान की शुरुआत से अब तक कुल 196 मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है।
यातायात पुलिस का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल चालान काटना या दंड देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
अभियान की शुरुआत स्कूल प्राचार्यों की बैठक से हुई, जिसमें उन्हें नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के खतरों और मोटरयान अधिनियम के कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन के सहयोग से शहर के विभिन्न स्कूलों के बाहर विशेष निगरानी अभियान शुरू किया गया। जहां भी नाबालिग छात्र वाहन चलाते मिले, उनके अभिभावकों को यातायात मुख्यालय बुलाकर काउंसलिंग की जा रही है।

इसी क्रम में आयोजित काउंसलिंग सत्र में एसीपी सीमा अहिरवार ने अभिभावकों से कहा कि नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने देना केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि उनके जीवन और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है। उन्होंने बताया कि कम उम्र में बच्चे वाहन चलाना तो सीख लेते हैं, लेकिन सड़क पर अचानक आने वाली परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की परिपक्वता विकसित नहीं होती, जिससे दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
काउंसलिंग के दौरान अभिभावकों से अपील की गई कि वे बच्चों को स्वयं वाहन चलाकर स्कूल भेजने के बजाय स्कूल बस, सार्वजनिक परिवहन, साइकिल या अन्य सुरक्षित साधनों का उपयोग करने के लिए प्रेरित करें। साथ ही यह भी समझाया गया कि प्रत्येक अभिभावक की पहली जिम्मेदारी अपने बच्चे को सुरक्षित स्कूल भेजना और सुरक्षित घर वापस लाना है।
यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में भी यह अभियान लगातार जारी रहेगा। स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम, अभिभावकों के साथ संवाद और विशेष काउंसलिंग के माध्यम से सड़क सुरक्षा को जन-आंदोलन का रूप देने का प्रयास किया जाएगा।

यातायात पुलिस ने शहरवासियों से अपील की है कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। यदि अभिभावक स्वयं जिम्मेदारी निभाएं और नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने से रोकें, तो अनेक सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और विद्यार्थियों का भविष्य अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।
