रायपुर – कृषि अब केवल खेतों और पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है। विज्ञान, तकनीक, नवाचार, उद्यमिता और बाजार की बदलती जरूरतों ने कृषि को आज एक व्यापक और रोजगारोन्मुख क्षेत्र बना दिया है। ऐसे दौर में बी.एससी. (ऑनर्स) कृषि युवाओं को सरकारी नौकरी से लेकर अनुसंधान, बैंकिंग, एग्री-टेक, खाद्य प्रसंस्करण और अपना व्यवसाय शुरू करने तक करियर के अनेक विकल्प उपलब्ध करा रही है।
छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में कृषि शिक्षा का महत्व और बढ़ जाता है। धान के साथ दलहन-तिलहन, उद्यानिकी, पशुपालन, वनोपज, पारंपरिक एवं जनजातीय कृषि तथा कृषि-प्रसंस्करण के क्षेत्र युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं। प्रशिक्षित कृषि स्नातक आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और किसानों को बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बहुविषयक ज्ञान से खुलते हैं करियर के नए रास्ते
चार वर्षीय बी.एससी. (ऑनर्स) कृषि पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को मृदाविज्ञान, आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन, जैव प्रौद्योगिकी, कीट विज्ञान, पादप रोग विज्ञान, उद्यानिकी, कृषि अर्थशास्त्र, कृषि प्रसार, कृषि मौसम विज्ञान, कृषि सूक्ष्म जीव विज्ञान और कृषि व्यवसाय प्रबंधन जैसे विषयों का ज्ञान प्रदान करता है।
कृषि स्नातकों के लिए सरकारी विभागों, कृषि प्रसार, ग्रामीण विकास, कृषि विपणन, बीज संगठनों और विभिन्न कृषि विकास कार्यक्रमों में अवसर मौजूद हैं। वहीं बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र में कृषि ऋण, ग्रामीण बैंकिंग, फसल बीमा और कृषि वित्त से जुड़े क्षेत्रों में भी करियर बनाया जा सकता है।
निजी क्षेत्र में बीज, उर्वरक, जैव-इनपुट, फसल संरक्षण, कृषि यंत्र, खाद्य प्रसंस्करण, एग्री-टेक, कृषि विपणन और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
एग्री-टेक से बदल रहा खेती का भविष्य
भविष्य की खेती तकनीक आधारित होने जा रही है। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रिमोट सेंसिंग, GIS, सटीक कृषि, डिजिटल कृषि, स्मार्ट सिंचाई, कृषि डेटा एनालिटिक्स और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी तकनीकें कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे रही हैं।
कृषि के साथ डिजिटल और तकनीकी कौशल हासिल करने वाले युवाओं के लिए इन उभरते क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता की बड़ी संभावनाएं हैं।
नौकरी तलाशने के बजाय नौकरी देने का अवसर
बी.एससी. कृषि युवाओं को केवल नौकरी तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें उद्यमी बनने का अवसर भी देती है। नर्सरी, बीज उत्पादन, मशरूम उत्पादन, संरक्षित खेती, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जैव उर्वरक, जैव कीटनाशी, कस्टम हायरिंग सेंटर, ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं, मृदा एवं जल परीक्षण, मधुमक्खी पालन, खाद्य प्रसंस्करण और डिजिटल कृषि परामर्श जैसे क्षेत्रों में युवा अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
IGKV में शिक्षा के साथ व्यावहारिक अनुभव पर जोर
कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विश्वविद्यालय में प्रायोगिक कक्षाओं, खेत प्रयोगों, शैक्षणिक भ्रमण, अनुभवात्मक अधिगम और कृषक समुदाय से संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाता है।
विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं, चावल अनुसंधान सुविधाएं और NABL मान्यता प्राप्त कीटनाशी अवशेष विश्लेषण प्रयोगशाला विद्यार्थियों को अनुसंधान एवं प्रयोग के लिए बेहतर आधार प्रदान करती हैं। विश्वविद्यालय के पास 22 हजार से अधिक पारंपरिक धान जर्मप्लाज्म का समृद्ध संग्रह भी है, जो फसल सुधार, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु अनुकूलन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक संसाधन है।
प्लेसमेंट और करियर मार्गदर्शन से मजबूत हो रही तैयारी
विद्यार्थियों के व्यावसायिक विकास के लिए विश्वविद्यालय में करियर मार्गदर्शन एवं प्लेसमेंट तंत्र के माध्यम से कैंपस प्लेसमेंट, करियर काउंसलिंग, उद्योग संवाद, कौशल विकास, व्यक्तित्व विकास और व्यावसायिक अभिमुखीकरण जैसे अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।
प्रवेश परामर्श 2026-27 के तहत विज्ञान, प्रकृति, तकनीक, ग्रामीण विकास, व्यवसाय और उद्यमिता में रुचि रखने वाले कक्षा 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी कृषि शिक्षा के माध्यम से सरकारी सेवा, बैंकिंग, अनुसंधान, उच्च शिक्षा, कृषि व्यवसाय, एग्री-टेक, खाद्य प्रसंस्करण, परामर्श और उद्यमिता के क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकते हैं।
अभ्यर्थियों को प्रवेश की पात्रता, काउंसलिंग, सीटों की उपलब्धता, शुल्क और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी के लिए IGKV की नवीनतम आधिकारिक प्रवेश अधिसूचना का अवलोकन करना चाहिए।
