रायपुर – छत्तीसगढ़ में स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने और ‘‘वोकल फॉर लोकल’’ की अवधारणा को धरातल पर उतारने की दिशा में ग्रामोद्योग विभाग लगातार काम कर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश और ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश के बुनकरों तथा महिला स्व-सहायता समूहों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के साथ उनके पारिश्रमिक का भुगतान सीधे बैंक खातों में किया जा रहा है।
अगस्त 2026 में ग्रामोद्योग विभाग ने प्रदेश के 26 जिलों की 121 बुनकर सहकारी समितियों के माध्यम से किए गए बुनाई कार्य के एवज में 397.31 लाख रुपये का पारिश्रमिक भुगतान किया। वहीं, 873 महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिला सदस्यों को गणवेश सिलाई कार्य के लिए 192 लाख रुपये का सिलाई पारिश्रमिक प्रदान किया गया। इस तरह अगस्त माह में कुल 589.31 लाख रुपये की राशि RTGS के माध्यम से सीधे संबंधित हितग्राहियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की गई।
आठ महीने में 5561 लाख रुपये का भुगतान
राज्य हाथकरघा संघ द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 तक प्रदेश के बुनकरों और महिला समूहों को बड़े स्तर पर पारिश्रमिक का भुगतान किया जा चुका है। अब तक 345 बुनकर सहकारी समितियों को बुनाई पारिश्रमिक के रूप में 3717 लाख रुपये, जबकि 2005 महिला स्व-सहायता समूहों को गणवेश सिलाई कार्य के लिए 1844 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। दोनों मदों को मिलाकर अब तक 5561 लाख रुपये सीधे बैंक खातों में RTGS के जरिए पहुंचाए गए हैं।
स्थानीय हुनर को मिल रहा बाजार और रोजगार
ग्रामोद्योग विभाग की इस पहल से प्रदेश के पारंपरिक बुनकरों को अपने हुनर के जरिए रोजगार मिल रहा है, वहीं महिला स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को गणवेश सिलाई जैसे कार्यों से आय का स्थायी जरिया मिल रहा है। खास बात यह है कि रोजगार के अवसर स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ महिलाओं और कारीगरों की आर्थिक आत्मनिर्भरता भी बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार ‘‘वोकल फॉर लोकल’’ की सोच को आगे बढ़ाते हुए ग्रामोद्योग विभाग स्थानीय उत्पाद, स्थानीय हुनर और स्थानीय श्रम को प्रोत्साहित कर रहा है। विभाग का प्रयास है कि प्रदेश के बुनकरों और महिला समूहों को काम के लिए दूसरे स्थानों की ओर पलायन न करना पड़े और उनके कौशल को उनके अपने क्षेत्र में ही रोजगार का आधार बनाया जा सके।
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा (आईएएस) की अगुवाई में बुनाई और गणवेश सिलाई के कार्यों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।
पारिश्रमिक की राशि सीधे बैंक खातों में भेजे जाने से भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता भी सुनिश्चित हो रही है।
इस पहल से एक ओर जहां छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हाथकरघा और ग्रामोद्योग को मजबूती मिल रही है, वहीं दूसरी ओर हजारों बुनकरों और महिलाओं के हाथों को स्थानीय स्तर पर काम और परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक संबल मिल रहा है।
