रायपुर – रेशम पालन को किसानों की अतिरिक्त आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनाने की दिशा में रायपुर में शहतूत रेशम कृषक सम्मेलन का आयोजन किया गया। ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ कार्यक्रम के तहत केंद्रीय रेशम बोर्ड और ग्रामोद्योग विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में किसानों को वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर गुणवत्तापूर्ण कोकून उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यालय उपसंचालक रेशम, रायपुर में आयोजित सम्मेलन में रायपुर, धमतरी, दुर्ग और महासमुंद के करीब 100 कृषकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश राणा (IAS) ने किसानों से रेशम पालन को पारंपरिक गतिविधि तक सीमित न रखते हुए इसे व्यावसायिक स्तर पर विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक रेशम पालन और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने किसानों को ‘सिल्क-समग्र’ योजना का लाभ उठाने पर भी जोर दिया।

रिसर्च और किसान के बीच तकनीकी दूरी कम करना लक्ष्य
बीटटीएसएसओ बिलासपुर की निदेशक डॉ. पुनीतावती ने कहा कि ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ कार्यक्रम का उद्देश्य अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीक को किसानों तक पहुंचाना और रिसर्च इंस्टीट्यूट तथा कृषकों के बीच मौजूद तकनीकी अंतर को कम करना है। उन्होंने बाई-वोल्टाइन क्रॉप और शहतूत की वैज्ञानिक खेती के जरिए उत्पादन और आमदनी बढ़ाने की संभावनाओं की जानकारी दी।
संयुक्त संचालक रेशम मुख्यालय रायपुर सी.एस. नोनहारे ने सेरीकल्चर को रोजगार और अतिरिक्त आय का बेहतर माध्यम बताते हुए वैज्ञानिक रियरिंग, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और आधुनिक प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की जरूरत बताई।
बीमारी से बचाव से लेकर कोकून उत्पादन तक प्रशिक्षण
सम्मेलन में किसानों को रेशम कीट पालन के विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी दी गई। वैज्ञानिक ‘बी’ कुमारी रंजीता बाई एच. ने रेशम कीटों में होने वाले रोग, रोग प्रबंधन, रियरिंग हाउस की स्वच्छता और प्रभावी कीटाणुशोधन की तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया।
तकनीकी विशेषज्ञ अरविंद मसराम ने रेशम कीट की पांचों अवस्थाओं के साथ पत्ती प्रबंधन, मोल्टिंग, माउंटिंग और पोस्ट-कोकून गतिविधियों की जानकारी साझा की। किसानों को बताया गया कि छोटी-छोटी वैज्ञानिक सावधानियां अपनाकर कोकून की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार किया जा सकता है।
उपसंचालक रेशम रायपुर ठाकुर राम उइके ने रायपुर एवं अधीनस्थ जिलों में संचालित विभागीय गतिविधियों तथा शहतूत रेशम पालन के विस्तार की जानकारी दी।
चार जिलों के किसानों की रही भागीदारी
सम्मेलन में रायपुर जिले के 20, धमतरी के 40, दुर्ग के 10 और महासमुंद के 30 कृषक शामिल हुए। अधिकारियों ने किसानों को शहतूत क्षेत्र के विस्तार, वैज्ञानिक रियरिंग और बेहतर कोकून उत्पादन के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के समापन पर कुमारी रंजीता बाई एच. ने सम्मेलन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया।
