रायपुर – गणेशोत्सव के दौरान रायपुर यातायात पुलिस ने एक बार फिर अपने मानवीय और संवेदनशील चेहरे का परिचय दिया। घर से नाराज होकर बिना बताए भाटापारा से ट्रेन में बैठकर रायपुर पहुंचे 15 वर्षीय नाबालिग बालक को यातायात पुलिस ने स्टेशन चौक के पास रोते हुए देखा। पुलिसकर्मियों ने तत्काल बालक के पास पहुंचकर उसे ढांढस बंधाया और भरोसे में लेकर पूरी जानकारी हासिल की। इसके बाद परिजनों से संपर्क कर बालक को सुरक्षित उनके सुपुर्द कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, यातायात थाना फाफाडीह प्रभारी अम्बरीश शर्मा अपने हमराह स्टाफ आरक्षक क्रमांक 606 गोपाल सिदार एवं सैनिक क्रमांक 03 मोहसिन खान के साथ गणेशोत्सव के दौरान क्षेत्र में भ्रमण कर रहे थे। इसी दौरान स्टेशन चौक, गेट नंबर-01 के पास उनकी नजर अकेले बैठे और रो रहे एक नाबालिग बालक पर पड़ी।
पुलिस टीम ने बिना देर किए बालक से बातचीत शुरू की। शुरुआत में डरा और सहमा हुआ बालक कुछ बताने में झिझक रहा था। पुलिसकर्मियों ने उसे भरोसा दिलाया और सहानुभूतिपूर्वक पूछताछ की। बातचीत के दौरान बालक ने अपना पता भाटापारा, जिला बलौदाबाजार बताया।
बालक ने पुलिस को बताया कि वह पिता की डांट से नाराज होकर बिना बताए घर से निकल गया था और ट्रेन पकड़कर रायपुर पहुंच गया। रायपुर आने के बाद वह डर गया था और वापस घर जाने को लेकर असमंजस में था। पुलिस टीम ने उसे समझाया और हिम्मत बढ़ाते हुए परिवार के पास सुरक्षित लौटने के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद पुलिस ने बालक द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर उसके परिजनों से दूरभाष के माध्यम से संपर्क किया और पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही बालक के मामा और बहन रायपुर पहुंचे। पुलिस ने आवश्यक पहचान और तस्दीक की कार्रवाई पूरी करने के बाद नाबालिग को सुरक्षित उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
पुलिस ने बालक और उसके परिजनों को भी समझाइश दी तथा भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर घर से बिना बताए कहीं नहीं जाने की सलाह दी। बालक के सुरक्षित मिलने पर परिजनों ने राहत की सांस ली और रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की त्वरित कार्रवाई एवं संवेदनशील व्यवहार के लिए आभार व्यक्त किया।
इस पूरे घटनाक्रम में यातायात थाना फाफाडीह प्रभारी अम्बरीश शर्मा, आरक्षक क्रमांक 606 गोपाल सिदार और सैनिक क्रमांक 03 मोहसिन खान की तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता सराहनीय रही। पुलिसकर्मियों की सतर्कता के चलते एक परेशान नाबालिग को समय रहते सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाया जा सका।
