रायपुर – छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मिथिलेश चौधरी की कथित बेनामी संपत्तियों और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों को लेकर मामला गरमा गया है। इन आरोपों की जांच की मांग करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ताओं ने संपत्तियों के स्वामित्व, आय के स्रोत और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
इस शिकायत के बाद अब निगाहें जांच एजेंसी के अगले कदम पर टिकी हैं। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और किसी भी तरह की अनियमितता के संबंध में आधिकारिक जांच के निष्कर्ष अभी सामने आना बाकी हैं।
राजनांदगांव में तैनाती के दौरान की शिकायतों का भी जिक्र
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि डॉ. मिथिलेश चौधरी के राजनांदगांव में CMHO पद पर पदस्थ रहने के दौरान भी कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए थे। अब रायपुर में जिम्मेदारी संभालने के दौरान भी उनके खिलाफ शिकायतें किए जाने का दावा किया जा रहा है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पूर्व में उठाए गए सवालों की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि किसी मामले में जांच लंबित है, तो उसकी प्रगति सार्वजनिक की जानी चाहिए। हालांकि, पूर्व की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
मां गंगा डायग्नोस्टिक सेंटर और श्री कृष्णा हॉस्पिटल की संपत्तियां जांच के घेरे में लाने की मांग
शिकायत में राजनांदगांव स्थित मां गंगा डायग्नोस्टिक सेंटर और श्री कृष्णा हॉस्पिटल से जुड़ी संपत्तियों के स्वामित्व, निर्माण में निवेश की गई राशि और आय के स्रोतों की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि इन संपत्तियों में कथित तौर पर अनुचित तरीके से अर्जित धन का इस्तेमाल हुआ हो सकता है। उनका कहना है कि संबंधित संपत्तियों के दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और वैध आय के स्रोतों की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
हालांकि, इन संस्थानों या संपत्तियों का स्वामित्व, उनके निर्माण में निवेश की गई राशि और किसी कथित भ्रष्टाचार से उनका संबंध अभी आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है। इसलिए इन दावों की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकती है।
भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर भी उठाए गए सवाल
शिकायतकर्ताओं ने राजनांदगांव में कर्मचारी भर्ती से जुड़े कथित घोटाले को लेकर पहले शिकायतें किए जाने का भी उल्लेख किया है। अब संपत्तियों और आय के स्रोतों की जांच की मांग के साथ पुराने आरोपों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है।
सवाल यह है कि यदि इन मामलों में औपचारिक शिकायतें दर्ज हुई थीं, तो उनकी जांच कहां तक पहुंची? क्या किसी स्तर पर जांच या विभागीय कार्रवाई हुई? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और जांच एजेंसियों के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगा।
स्वास्थ्य मंत्री से भी जवाब मांग रहे शिकायतकर्ता
शिकायतकर्ताओं ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से भी सवाल उठाए हैं कि अधिकारी के खिलाफ शिकायतों की स्थिति और उन पर की गई कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है।
शिकायत में पद के कथित दुरुपयोग और प्रभावशाली संबंधों के जरिए अधिकारियों पर दबाव बनाने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, राजनीतिक संरक्षण, दबाव या कमीशन से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
आवास और अन्य ठिकानों की तलाशी की मांग
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि आवश्यकता और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप संबंधित आवास एवं अन्य ठिकानों की तलाशी लेकर दस्तावेजों की जांच की जाए। साथ ही, ज्ञात आय, संपत्तियों, निवेश और वित्तीय लेन-देन का मिलान किया जाए।
उनका कहना है कि यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति, बेनामी संपत्ति या अन्य वित्तीय अनियमितताओं के प्रमाण मिलते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि तलाशी, छापेमारी या किसी दंडात्मक कार्रवाई का निर्णय जांच एजेंसी तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर लेती है। फिलहाल, ऐसी किसी कार्रवाई की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल
स्वास्थ्य विभाग आम नागरिकों के इलाज, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक संसाधनों के प्रबंधन से जुड़ा महत्वपूर्ण विभाग है। ऐसे में किसी वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आने पर निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—ACB इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है? क्या संबंधित संपत्तियों के दस्तावेजों और आय के स्रोतों की जांच होगी? क्या पूर्व में की गई शिकायतों की स्थिति स्पष्ट की जाएगी? और क्या संबंधित अधिकारी तथा विभाग इन आरोपों पर अपना आधिकारिक पक्ष रखेंगे?
फिलहाल मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। आरोपों को साबित करने या खारिज करने का फैसला जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही होना चाहिए। शिकायतकर्ताओं ने जल्द जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। अब जांच एजेंसी की आधिकारिक प्रतिक्रिया और संबंधित पक्षों का बयान महत्वपूर्ण होगा।
