रायपुर – छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में इस बार ग्रामोद्योग विभाग ने प्रदेश की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प, हथकरघा और ग्रामीण महिलाओं के हुनर को एक बड़ा मंच प्रदान किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव के मार्गदर्शन में विभाग ने न केवल प्रदेश के बुनकरों, शिल्पकारों और महिला स्व-सहायता समूहों के उत्पादों का आकर्षक प्रदर्शन किया, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की है। राज्योत्सव में जहां स्वदेशी उत्पादों को लोगों की सराहना मिली, वहीं बुनकरों और महिला समूहों को करोड़ों रुपये का पारिश्रमिक भुगतान कर रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया गया।

64 स्टॉलों में दिखी छत्तीसगढ़ के हुनर की झलक
राज्योत्सव परिसर के शिल्पग्राम में ग्रामोद्योग विभाग के अंतर्गत आने वाले रेशम, हस्तकरघा, खादी, ग्रामोद्योग, माटीकला बोर्ड एवं हस्तशिल्प विकास बोर्ड के माध्यम से कुल 64 स्टॉल लगाए गए। यहां प्रदेश के उत्कृष्ट बुनकरों, शिल्पियों और कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों का जीवंत प्रदर्शन किया गया। हथकरघा संघ के प्रीमियम ब्रांड ‘कोसा फेब’ के अंतर्गत तैयार अलसी जैकेट, बस्तर एवं सुकमा की पुनर्वासित महिलाओं द्वारा बनाए गए कपड़े, सॉफ्ट टॉयज, कुशन, खिलौने, टिफिन बैग, टेबल रनर, वॉल डेकोर, सोफा कवर, योगा ड्रेस, योगा मैट और अन्य आकर्षक उत्पाद लोगों के विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
इस बार राज्योत्सव में पहली बार हथकरघा वस्त्रों के परिधानों का विशेष रैंप वॉक भी आयोजित किया गया। इसमें बस्तर एवं सुकमा जिले की पुनर्वासित महिलाओं और बुनकरों के परिवारों की बेटियों ने पारंपरिक वस्त्रों का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही शिल्पग्राम में बुनकरों, शिल्पियों और कुम्हारों के संघर्ष, सफलता तथा उनके जीवन की प्रेरक कहानियों को क्यूआर कोड के माध्यम से आम नागरिकों तक पहुंचाया गया। माटीकला और हस्तशिल्प के उत्पादों का भी जीवंत प्रदर्शन किया गया।

13 दिनों में 52.84 लाख रुपये की बिक्री
राज्योत्सव के तीन दिवसीय आयोजन में ग्रामोद्योग विभाग के स्टॉलों पर लोगों ने जमकर खरीदारी की। हथकरघा वस्त्रों की 33.57 लाख रुपये, हस्तशिल्प सामग्री की 12.80 लाख रुपये, माटीकला उत्पादों की 4.11 लाख रुपये तथा खादी वस्त्रों एवं सामग्रियों की 2.36 लाख रुपये की बिक्री हुई। इस तरह कुल 52.84 लाख रुपये के उत्पादों का कारोबार हुआ। यह आंकड़ा प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि और स्थानीय कारीगरों के हुनर पर भरोसे को दर्शाता है।
बुनकरों और महिला समूहों को 941 लाख रुपये का भुगतान
ग्रामोद्योग विभाग की सबसे महत्वपूर्ण पहल बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक मजबूती देना है। अक्टूबर 2026 में प्रदेश के 26 जिलों की 302 बुनकर सहकारी समितियों को 760 लाख रुपये, 3 नवंबर को 49 बुनकर सहकारी समितियों को 150 लाख रुपये तथा 128 महिला स्व-सहायता समूहों को 31 लाख रुपये का भुगतान किया गया। इस प्रकार कुल 941 लाख रुपये यानी 9 करोड़ 41 लाख रुपये की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से हस्तांतरित की गई।

वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3 नवंबर तक राज्य हथकरघा संघ द्वारा 345 बुनकर सहकारी समितियों को बुनाई कार्य के लिए 5,487 लाख रुपये और 2,005 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई कार्य के लिए 2,117 लाख रुपये का पारिश्रमिक भुगतान किया गया। इसके अलावा 29 आश्रित परिवारों को 5.80 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तथा 11 पुरस्कृत हितग्राहियों को 3.74 लाख रुपये की मासिक सहायता दी गई। इस तरह कुल 7,613.54 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
पुनर्वासित महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल
मुख्यमंत्री की ‘वोकल फॉर लोकल’ की परिकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए सुकमा, बस्तर, कोरबा और जशपुर की 30 पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ने की पहल की गई है। उन्हें निःशुल्क सिलाई मशीनें उपलब्ध कराने के साथ हथकरघा संघ के अनुपयोगी कपड़ों से खिलौने, थैले और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा के नेतृत्व में ये प्रयास प्रदेश की पारंपरिक कला को नई पहचान देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं। राज्योत्सव में मिली सफलता यह संदेश दे रही है कि छत्तीसगढ़ का स्थानीय हुनर अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि रोजगार, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन रहा है।
