शशिकांत सनसनी की रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ – करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए रेलवे ओवरब्रिज अगर पहली ही बारिश का सामना नहीं कर पाए, तो ऐसे निर्माण पर जनता भरोसा कैसे करे? राजनांदगांव जिले में बरगा और आलीवारा के नए रेलवे ओवरब्रिज पहली ही तेज बारिश में बदहाल हो गए हैं। कहीं सड़क सात फीट तक धंस गई, कहीं डामर उखड़ गया तो कहीं लंबी-लंबी दरारों ने निर्माण की गुणवत्ता की पोल खोल दी। करोड़ों की लागत से बने इन पुलों की ऐसी हालत देखकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और लोग इसे सीधे तौर पर निर्माण में लापरवाही या भ्रष्टाचार का परिणाम बता रहे हैं।
शनिवार रात हुई तेज बारिश ने रेलवे और निर्माण एजेंसियों के दावों की हकीकत सामने ला दी। करीब दो महीने पहले शुरू किए गए बरगा रेलवे ओवरब्रिज पर लगभग 100 मीटर तक सड़क में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। कई स्थानों पर सड़क सात फीट तक धंस गई है, जबकि 10 से 15 फीट तक डामर पूरी तरह उखड़ गया है। पुल की एप्रोच रोड की यह हालत देखकर वाहन चालकों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आवाजाही नहीं रोकी गई, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
हैरानी की बात यह है कि जिस पुल को वर्षों तक उपयोग में रहना चाहिए था, वह पहली ही बारिश की परीक्षा में बुरी तरह फेल हो गया। इससे साफ सवाल उठ रहा है कि आखिर निर्माण के दौरान गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई थी? क्या निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप थी? क्या अधिकारियों ने केवल कागजों में गुणवत्ता जांच पूरी कर दी?
बरगा के बाद आलीवारा रेलवे ओवरब्रिज की तस्वीर भी कम चिंताजनक नहीं है। करीब एक महीने पहले शुरू हुए इस ओवरब्रिज की एप्रोच रोड पर पहली बारिश के बाद ही चौड़ी-चौड़ी दरारें दिखाई देने लगीं और सड़क बैठने लगी। हालात बिगड़ते देख रेलवे ने आनन-फानन में मरम्मत कार्य शुरू कराया, लेकिन ग्रामीणों ने इसका विरोध कर दिया। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए नए पुल में पैबंद लगाने का कोई औचित्य नहीं है। यदि निर्माण दोषपूर्ण है तो केवल मरम्मत नहीं, बल्कि पूरी सड़क उखाड़कर दोबारा निर्माण कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि जनता के टैक्स के पैसे से बने इन पुलों का यह हाल बेहद शर्मनाक है। यदि पहली ही बारिश में सड़क धंस रही है, तो आने वाले वर्षों में इन पुलों की स्थिति क्या होगी? लोगों ने निर्माण एजेंसी, गुणवत्ता जांच करने वाले अधिकारियों और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यदि निर्माण पूरी गुणवत्ता से हुआ होता, तो पहली ही बारिश में ऐसी तस्वीर सामने नहीं आती।
यह पहली बार नहीं है जब रेलवे ओवरब्रिज निर्माण को लेकर सवाल खड़े हुए हों। इससे पहले मनगटा-मुढ़ीपार रेलवे ओवरब्रिज में भी इसी तरह की गंभीर खामियां सामने आई थीं। वह मामला विधानसभा तक पहुंचा था और निर्माण गुणवत्ता पर तीखी बहस हुई थी। अब बरगा और आलीवारा में भी लगभग वैसी ही स्थिति सामने आने से यह सवाल और गंभीर हो गया है कि आखिर लगातार एक जैसी लापरवाही क्यों दोहराई जा रही है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हर बार करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी पुल पहली बारिश में ही जवाब दे रहे हैं, तो इसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है। केवल लीपापोती और मरम्मत कर देने से समस्या खत्म नहीं होगी। आवश्यकता इस बात की है कि स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों से पूरे निर्माण की जांच कराई जाए और यदि निर्माण में गड़बड़ी या मानकों की अनदेखी साबित होती है तो संबंधित एजेंसी और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
इधर रेलवे अधिकारियों का कहना है कि क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराई जा रही है। सीनियर सेक्शन इंजीनियर ए.के. मौर्य के अनुसार स्थायी समाधान के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि ग्रामीण इस दावे से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि पहली बारिश में ही क्षतिग्रस्त हुए पुल पर केवल मरम्मत करना जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। यदि नींव और निर्माण प्रक्रिया में ही कमी है तो पैबंद लगाने से भविष्य का खतरा खत्म नहीं होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की परियोजनाओं की निगरानी कौन कर रहा है? यदि निर्माण शुरू होने से लेकर पूरा होने तक तकनीकी परीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण सही तरीके से हुआ होता, तो शायद आज यह स्थिति नहीं बनती। पहली बारिश में ही सड़क धंसना और डामर उखड़ना किसी सामान्य तकनीकी समस्या का संकेत नहीं, बल्कि गंभीर निर्माण खामी की ओर इशारा करता है।
राजनांदगांव के इन दोनों रेलवे ओवरब्रिजों ने एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जनता अब केवल मरम्मत नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, दोषियों की जवाबदेही और जरूरत पड़ने पर नए सिरे से निर्माण की मांग कर रही है। अब निगाहें रेलवे प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में केवल खानापूर्ति होगी या फिर करोड़ों रुपये के इस कथित निर्माण खेल की सच्चाई सामने लाकर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
