छत्तीसगढ़ – महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जम्हारी में शिक्षकों की कमी को लेकर बीते सात दिनों से चल रहा छात्राओं का आंदोलन आखिरकार रंग ले आया। B24Express द्वारा इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने और छात्राओं की आवाज को लगातार सामने लाने के बाद प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर के निर्देश पर तत्काल व्यवस्था करते हुए प्रतिभा पब्लिक स्कूल से चार अस्थायी शिक्षकों की तैनाती की गई। इसके बाद गुरुवार 16 जुलाई को सात दिनों से बंद पड़ा स्कूल दोबारा खुल गया और छात्राएं कक्षाओं में लौटीं।
जम्हारी स्कूल में लंबे समय से विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई थी। हालात इतने खराब थे कि 150 छात्र-छात्राओं वाले इस स्कूल में केवल तीन शिक्षक ही कार्यरत थे। गणित, संस्कृत, अर्थशास्त्र, भूगोल, सामाजिक विज्ञान और राजनीति विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही थी। खासकर कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया था।

समस्या का समाधान नहीं होने से नाराज छात्राओं ने सात दिन पहले स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया था और स्पष्ट घोषणा कर दी थी कि जब तक विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक स्कूल का ताला नहीं खुलेगा। बारिश, उमस और तेज धूप के बीच छात्राएं लगातार धरने पर डटी रहीं। इस आंदोलन को अभिभावकों का भी पूरा समर्थन मिला।
छात्राओं ने बताया था कि शिक्षक नहीं होने के कारण उनकी पढ़ाई भगवान भरोसे चल रही है। कई बार शिक्षा विभाग और प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
B24Express ने इस पूरे मामले को प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए शिक्षा व्यवस्था की हकीकत को सामने रखा। खबर सामने आने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ और कलेक्टर के स्तर पर पूरे मामले की समीक्षा की गई। इसके बाद तत्काल राहत के रूप में प्रतिभा पब्लिक स्कूल से चार अस्थायी शिक्षकों की व्यवस्था की गई।
शाला विकास समिति के अध्यक्ष मोहन कुमार ने बताया कि फिलहाल ये चार शिक्षक अगले चार महीनों तक विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे। इस दौरान शासन द्वारा नियमित शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विद्यार्थियों की पढ़ाई अब बाधित नहीं होने दी जाएगी।
स्कूल खुलने के बाद छात्राओं ने राहत की सांस ली, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि उनकी लड़ाई केवल अस्थायी व्यवस्था तक सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य स्कूल में स्थायी और विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित कराना है, ताकि भविष्य में फिर ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।

यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर साबित करता है कि जब जनता की आवाज मजबूती से उठती है और मीडिया जनहित के मुद्दों को जिम्मेदारी से सामने लाता है, तो प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ती है। जम्हारी स्कूल की छात्राओं का संघर्ष अब उन हजारों विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा बन गया है, जो वर्षों से शिक्षकों की कमी के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
फिलहाल सात दिनों से बंद पड़ा स्कूल खुल चुका है, कक्षाएं शुरू हो गई हैं और विद्यार्थियों के चेहरों पर उम्मीद लौट आई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन अपने वादे के अनुसार नियमित शिक्षकों की नियुक्ति कब तक करता है, ताकि जम्हारी स्कूल में शिक्षा व्यवस्था स्थायी रूप से पटरी पर लौट सके।
