रायपुर – छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का पांचवां और अंतिम दिन शुक्रवार को भारी राजनीतिक घमासान के साथ समाप्त हुआ। सदन में महतारी वंदन योजना से 1.55 लाख महिलाओं के नाम हटने के मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, जबकि विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट कर दिया। वहीं, सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर करीब साढ़े चार घंटे तक जोरदार बहस चली, जिसमें सत्ता और विपक्ष ने एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक हमले किए।
महतारी वंदन योजना को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाया कि योजना के लाभार्थियों की संख्या 70.09 लाख से घटकर 68.54 लाख कैसे हो गई। इस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने स्पष्ट किया कि जिन महिलाओं के नाम हटाए गए हैं, उनमें मृत्यु हो जाना, ई-केवाईसी नहीं कराना, आयकरदाता बन जाना तथा अपात्र पाए जाना प्रमुख कारण हैं। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी और वॉकआउट कर दिया।
इससे पहले प्रश्नकाल में भी राशन व्यवस्था को लेकर सरकार को सवालों का सामना करना पड़ा। विधायक शेषराज हरबंस ने अंत्योदय कार्डधारियों को 7 किलो अतिरिक्त चावल देने की मांग उठाई। वहीं भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने राशन दुकानों में कथित तौर पर जबरन मसाले बेचने का आरोप लगाते हुए अपनी ही सरकार से जवाब मांगा। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि यदि शिकायत और दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं तो पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रश्नकाल के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भाजपा सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोप पत्र पेश करते हुए अविश्वास प्रस्ताव रखा। महंत ने अपने विस्तृत वक्तव्य में हसदेव अरण्य, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, कानून व्यवस्था, पेसा कानून के क्रियान्वयन, आदिवासी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण, अबूझमाड़ में कथित पेड़ कटाई, भारतमाला परियोजना और आबकारी विभाग में कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
महंत ने हसदेव अरण्य को “मध्य भारत के फेफड़े” बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार पर्यावरण की अनदेखी कर कोयला खनन को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने वर्ष 2022 में विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित उस प्रस्ताव का उल्लेख किया, जिसमें हसदेव अरण्य के कोल ब्लॉकों को निरस्त करने की मांग की गई थी। उन्होंने दावा किया कि 91 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की अनुमति से लगभग 15 हजार पेड़ों की कटाई होगी, जो प्रदेश के पर्यावरण और आदिवासी हितों के खिलाफ है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि दूसरे राज्यों के उद्योगपतियों के हितों के लिए छत्तीसगढ़ के जंगलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने भगवान राम का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन जंगलों का संबंध उनकी यात्रा से बताया जाता है, उनकी रक्षा करने में सरकार असफल रही है। महंत ने यह भी आरोप लगाया कि अंधाधुंध खनन के कारण मानव-हाथी संघर्ष बढ़ रहा है और प्रदेश की प्राकृतिक संपदा खतरे में है।
अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में FL-10 व्यवस्था के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उस दूषित व्यवस्था को आगे बढ़ाने के बजाय उसे सुधारने का काम किया है।
विजय शर्मा ने कहा, “मुख्यमंत्री ने उस व्यवस्था को हाथ भी नहीं लगाया, बल्कि चिमटे से पकड़कर ठीक करने का काम किया है।” उन्होंने विपक्ष पर कोयला घोटाले जैसे मामलों में चुप रहने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार कानून व्यवस्था, नक्सल नीति और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में लगातार बेहतर काम कर रही है।
दिनभर चले राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान सदन में कई बार माहौल गरमाया। महतारी वंदन योजना, राशन व्यवस्था और अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। हंगामे और वॉकआउट के बीच मानसून सत्र का अंतिम दिन पूरी तरह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और जोरदार टकराव का गवाह बन गया।
