रायपुर – राजधानी के सिविल लाइन स्थित प्रतिष्ठित सीए तारवानी एंड एसोसिएट्स कार्यालय में हुई लाखों रुपये की चोरी का पुलिस ने महज 30 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में सामने आया कि वारदात का मास्टरमाइंड ऑफिस का पूर्व कर्मचारी उमेश पोर्ते है, जिसे कार्यालय में रखी नकदी और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी थी।

पुलिस के अनुसार, 21 जुलाई की सुबह कार्यालय में चोरी का पता चलने पर कैशियर अपर्णा नायक ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई। अज्ञात चोरों ने रात के समय कार्यालय में घुसकर कैश काउंटर का लॉक कटर से काटा और वहां रखी लाखों रुपये की नकदी लेकर फरार हो गए।
घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला और पुलिस उपायुक्त (मध्य क्षेत्र) तारकेश्वर पटेल के निर्देशन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा सिविल लाइन थाना पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, सीसीटीवी फुटेज खंगाले और कार्यालय के वर्तमान एवं पूर्व कर्मचारियों से गहन पूछताछ की।
जांच के दौरान संदेह पूर्व कर्मचारी उमेश पोर्ते पर गया, जो कुछ समय पहले नौकरी छोड़ चुका था। पुलिस ने उसे बिलासपुर से हिरासत में लेकर पूछताछ की, जहां उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी ने बताया कि उसे कार्यालय में रखी नकदी की जानकारी थी और इसी वजह से उसने अपने साथी लक्ष्मीनारायण ध्रुव के साथ मिलकर चोरी की पूरी योजना बनाई थी।

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 7 लाख 80 हजार रुपये नकद बरामद कर लिए हैं। दोनों के खिलाफ सिविल लाइन थाना में अपराध क्रमांक 388/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने यह भी बताया कि मुख्य आरोपी उमेश पोर्ते का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। वह पहले बिलासपुर में मारपीट के मामलों में जेल जा चुका है। इस त्वरित कार्रवाई से रायपुर पुलिस ने एक बार फिर गंभीर आपराधिक मामलों के शीघ्र खुलासे की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि चोरी की रकम का कोई हिस्सा खर्च किया गया था या नहीं और आरोपियों की किसी अन्य वारदात में संलिप्तता तो नहीं है।
