रायपुर – जिले के नकटी गांव में सोमवार, 29 जून को प्रशासन द्वारा 48 मकानों पर बेदखली की कार्रवाई की तैयारी के बीच पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया है। स्थिति को देखते हुए मौके पर 1000 से अधिक पुलिस जवान तैनात किए गए हैं। प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सरकारी जमीन और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों को लेकर विवाद गहरा गया है।
प्रशासन का दावा है कि संबंधित मकान सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर बनाए गए हैं। इसी आधार पर राजस्व विभाग ने प्रभावित परिवारों को बेदखली नोटिस जारी किया है। दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत विधिवत स्वीकृति मिलने के बाद लोन लेकर मकान निर्माण कराया गया था। ऐसे में अब उन्हें अवैध कब्जाधारी बताकर हटाने की कार्रवाई पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि यदि संबंधित भूमि वास्तव में सरकारी थी, तो प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत इन मकानों का निर्माण कैसे हुआ? ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा अब गरीब परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर मकान बने हैं वह चकबंदी की भूमि है और चार बुजुर्गों के नाम दर्ज है। उनका दावा है कि यह भूमि आज तक पूरी तरह शासन के अधिकार में नहीं आई है। ऐसे में प्रशासन द्वारा सरकारी जमीन बताकर बेदखली की कार्रवाई करना उचित नहीं है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि जिस स्थान पर वे वर्षों से रह रहे हैं, वहां भविष्य में विधायक कॉलोनी बनाने की योजना है। इसी कारण उन्हें हटाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या जनप्रतिनिधियों तक भी पहुंचाई। वे सांसद ब्रजमोहन अग्रवाल सहित कई जिम्मेदार नेताओं से मिले, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
इस मामले में प्रशासन की ओर से भी चुप्पी देखने को मिल रही है। जब मीडिया ने एडीएम से इस संबंध में जानकारी लेने की कोशिश की तो उन्होंने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उन्हें उच्च अधिकारियों के निर्देश हैं कि इस विषय पर कोई बयान नहीं दिया जाए।
गौरतलब है कि बीते शुक्रवार मोहर्रम की सरकारी छुट्टी के बावजूद राजस्व विभाग की टीम भारी पुलिस बल के साथ रात करीब आठ बजे नकटी गांव पहुंची थी। वार्ड क्रमांक 16 और 17 के दर्जनों मकानों पर बेदखली नोटिस चस्पा किए गए, जिसके बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने नोटिस का विरोध करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
यह पहला अवसर नहीं है जब नकटी गांव के लोगों को बेदखली का सामना करना पड़ रहा है। पिछले वर्ष भी जिला प्रशासन ने इन्हीं ग्रामीणों को अवैध कब्जाधारी बताते हुए नोटिस जारी किया था और उन्हें हटाने का प्रयास किया था। उस समय ग्रामीणों के विरोध और कुछ जनप्रतिनिधियों के समर्थन के बाद प्रशासन को कार्रवाई रोकनी पड़ी थी। अब एक बार फिर वही स्थिति बन गई है और पूरा गांव असमंजस और भय के माहौल में जी रहा है।
फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर नकटी गांव पर टिकी हुई है। अब देखना होगा कि प्रशासन अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाता है या ग्रामीणों के दावों की निष्पक्ष जांच कर कोई नया समाधान निकालता है। फिलहाल भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच गांव में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।
