रायपुर – छत्तीसगढ़ के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण खबर है। बिजली बिल के लेट पेमेंट सरचार्ज (विलंब अधिभार) को लेकर सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में प्रसारित हो रही “दोहरा झटका”, “रोजाना ब्याज” और “हर दिन बढ़ेगा अतिरिक्त चार्ज” जैसी खबरों को छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि राज्य विद्युत नियामक आयोग (सीएसईआरसी) द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना नहीं, बल्कि उन्हें पहले से अधिक राहत देना है।
पावर कंपनी ने जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा है कि नई व्यवस्था के तहत लेट पेमेंट सरचार्ज की गणना अब प्रतिदिन के आधार पर होगी। पहले जहां नियत तिथि निकलने के बाद मात्र एक या दो दिन की देरी होने पर भी पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत लेट पेमेंट सरचार्ज लगाया जाता था, वहीं अब केवल जितने दिन की देरी होगी, उतने दिनों का ही 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से विलंब अधिभार लिया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को अनावश्यक अतिरिक्त शुल्क से राहत मिलेगी।
पुरानी व्यवस्था में मामूली देरी भी पड़ती थी भारी
पावर कंपनी के अनुसार, पहले की व्यवस्था में यदि कोई उपभोक्ता निर्धारित तिथि के अगले दिन भी बिजली बिल जमा करता था, तब भी उस पर पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत लेट पेमेंट सरचार्ज लगाया जाता था। यानी केवल एक दिन की देरी पर भी उपभोक्ता को पूरे महीने के बराबर विलंब शुल्क देना पड़ता था। इससे ऐसे उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान होता था जो किसी कारणवश एक-दो दिन की देरी से भुगतान कर पाते थे।
यही कारण था कि लंबे समय से इस व्यवस्था में बदलाव की मांग की जा रही थी ताकि उपभोक्ताओं को वास्तविक देरी के अनुसार ही शुल्क देना पड़े।
नई व्यवस्था बनी अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी
राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा लागू नई व्यवस्था में अब लेट पेमेंट सरचार्ज की गणना प्रतिदिन के आधार पर होगी। इसके तहत उपभोक्ताओं से केवल 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से विलंब अधिभार लिया जाएगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि जितने दिन भुगतान में देरी होगी, केवल उतने दिनों का ही शुल्क देना होगा।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी उपभोक्ता ने केवल एक दिन की देरी से बिजली बिल जमा किया, तो उसे अब पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत सरचार्ज नहीं देना पड़ेगा, बल्कि केवल 0.04 प्रतिशत का ही विलंब अधिभार लगेगा। इससे छोटे स्तर की देरी करने वाले लाखों उपभोक्ताओं को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
30 दिन की देरी पर भी पहले से कम रहेगा चार्ज
पावर कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई उपभोक्ता पूरे 30 दिनों की देरी से भी बिजली बिल जमा करता है, तब भी कुल विलंब अधिभार 1.2 प्रतिशत ही बनेगा। इसकी गणना 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन के हिसाब से की जाएगी। यह दर पहले लागू 1.5 प्रतिशत मासिक सरचार्ज से भी कम है।
इस प्रकार नई व्यवस्था में न केवल कम दिनों की देरी पर राहत मिलेगी, बल्कि पूरे महीने की देरी होने पर भी उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में कम भुगतान करना पड़ेगा।
‘रोजाना ब्याज’ और ‘दोहरा झटका’ जैसी खबरें भ्रामक
पावर कंपनी ने साफ शब्दों में कहा है कि सोशल मीडिया और कुछ माध्यमों में यह प्रचारित किया जा रहा है कि अब रोजाना ब्याज लगाया जाएगा और उपभोक्ताओं पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ेगा। कंपनी के अनुसार यह दावा पूरी तरह गलत है।
नई व्यवस्था में ब्याज की दर बढ़ाई नहीं गई है, बल्कि पहले की तुलना में कम की गई है। केवल शुल्क की गणना का तरीका बदला गया है ताकि उपभोक्ताओं से वास्तविक देरी के अनुसार ही राशि ली जा सके।
तथ्यों पर भरोसा करने की अपील
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने मीडिया संस्थानों, सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और आम नागरिकों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि की गई भ्रामक जानकारी साझा न करें। कंपनी ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए ही यह नई व्यवस्था लागू की गई है, जिससे अधिक पारदर्शिता आएगी और अनावश्यक आर्थिक बोझ कम होगा।
कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि नई व्यवस्था पूरी तरह उपभोक्ता हित में है और इससे बिजली बिल के विलंब भुगतान पर पहले की तुलना में कम अधिभार देना होगा। इसलिए उपभोक्ताओं को किसी भी अफवाह पर ध्यान देने के बजाय आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करना चाहिए।
