साय सरकार का जीरो टॉलरेंस एक्शन—गोदाम प्रभारी निलंबित, तकनीकी कर्मचारी की सेवा समाप्त; 60,236 मीटर संदिग्ध वेस्टेज जब्त
रायपुर – छत्तीसगढ़ में साय सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत हाथकरघा संघ में सामने आए गंभीर मामले पर बड़ी कार्रवाई हुई है। हैदराबाद की मारुति कोटेक्स लिमिटेड को हाथकरघा वस्त्रों की डाईंग, प्रोसेसिंग और प्रिंटिंग के लिए भेजे गए कपड़े के बदले हाथकरघा से भिन्न वेस्टेज कपड़ा संघ के गोदाम में भेजे जाने के मामले में अब कंपनी से 22 लाख 42 हजार 616 रुपये की वसूली के निर्देश जारी किए गए हैं।
मामले में तत्कालीन गोदाम प्रभारी रामकिशुन देवांगन को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है, जबकि संबंधित तकनीकी कर्मचारी की सेवा समाप्त कर दी गई है। प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा (आईएएस) के निर्देश पर कथित तौर पर गैर-हाथकरघा वेस्टेज कपड़े को जब्त भी किया गया है।
65 लाख मीटर ग्रे कपड़ा गया, 60 हजार मीटर पर उठे सवाल
वर्ष 2025-26 में हाथकरघा संघ ने जेम पोर्टल के माध्यम से नियमानुसार निविदा आमंत्रित कर मारुति कोटेक्स लिमिटेड, हैदराबाद को हाथकरघा ग्रे वस्त्रों का डाईंग/प्रोसेसिंग और प्रिंटिंग कार्य सौंपा था।
तत्कालीन गोदाम प्रभारी के माध्यम से कंपनी को करीब 65.06 लाख मीटर ग्रे वस्त्र भेजा गया। कंपनी ने करीब 63.16 लाख मीटर फ्रेश वस्त्र वापस प्रदाय किया, जबकि करीब 1.90 लाख मीटर कटपीस, सेकंड क्लास, मिस प्रिंट और वेस्टेज के रूप में वापस भेजा गया।
यहीं से पूरा मामला सवालों के घेरे में आ गया।
गोदाम स्तर से संघ कार्यालय को बताया गया कि कंपनी द्वारा भेजे गए 60,236 मीटर कटपीस/सेकंड क्लास/मिस प्रिंट/वेस्टेज हाथकरघा संघ के वस्त्र नहीं हैं। शिकायत और रिपोर्ट के बाद संघ कार्यालय ने विभागीय जांच कमेटी गठित कर भौतिक परीक्षण और नमूना जांच कराई।
जांच में खुला गैर-हाथकरघा कपड़े का खेल
जांच कमेटी की रिपोर्ट में मारुति कोटेक्स के विभिन्न देयकों—क्रमांक 545, 577, 583, 588 और 489—के माध्यम से 60,336 मीटर हाथकरघा से भिन्न अन्य वेस्टेज वस्त्र भेजे जाने की बात सामने आई।
जांच में तत्कालीन गोदाम प्रभारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई। आरोप है कि वेस्टेज वस्त्र के संबंध में संघ कार्यालय को समय पर जानकारी नहीं दी गई। वहीं प्राप्त डैमेज वस्त्रों को लेकर तकनीकी कर्मचारी द्वारा प्रस्तुत तकनीकी जांच प्रतिवेदन भी जांच में संदेहास्पद पाया गया।
इसके बाद विभाग ने कार्रवाई में देरी नहीं की। तकनीकी कर्मचारी की सेवा समाप्त कर दी गई, जबकि तत्कालीन गोदाम प्रभारी रामकिशुन देवांगन को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई।
22.42 लाख की वसूली क्यों?
जांच के बाद संघ को हुई वित्तीय क्षति की गणना भी की गई है। 60,236 मीटर अन्य वेस्टेज वस्त्र भेजे जाने के आधार पर ग्रे वस्त्र की दर 88.61 रुपये प्रति मीटर मानी गई। इससे वस्त्र की कुल कीमत 53,37,512 रुपये बैठती है।
इस राशि के 25 प्रतिशत के हिसाब से 13,34,378 रुपये तथा संघ द्वारा कंपनी को भुगतान किए गए 9,08,238 रुपये प्रिंटिंग चार्ज की राशि की शत-प्रतिशत वसूली के निर्देश दिए गए हैं।
इस तरह दोनों मदों को मिलाकर मारुति कोटेक्स लिमिटेड से कुल 22,42,616 रुपये वसूल किए जाएंगे।
अब सवाल सिर्फ कपड़े का नहीं, जवाबदेही का भी
पूरे प्रकरण ने हाथकरघा संघ की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर बड़ी मात्रा में हाथकरघा ग्रे वस्त्र बाहर भेजे जाने के बाद लौटाए गए वेस्टेज की गुणवत्ता और स्रोत की जांच समय रहते क्यों नहीं हुई? संबंधित अधिकारियों ने कार्यालय को समय पर सूचना क्यों नहीं दी? और तकनीकी परीक्षण में संदिग्ध रिपोर्ट कैसे सामने आई?
फिलहाल सरकार ने कार्रवाई के जरिए साफ संदेश दिया है कि सरकारी संसाधनों और विभागीय प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले में निलंबन, सेवा समाप्ति, वेस्टेज की जब्ती और 22.42 लाख रुपये की वसूली के आदेश ने हाथकरघा संघ में जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
