रायपुर – पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा कथित तौर पर “वैचारिक नक्सलियों” के समर्थन में दिए गए बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नरेश चंद्र गुप्ता ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। गुप्ता ने कहा कि नक्सलवाद का सबसे बड़ा दंश झेल चुके छत्तीसगढ़ की जनता, आदिवासी समाज और शहीद जवानों के जख्मों पर इस तरह का बयान सीधे तौर पर नमक छिड़कने जैसा है।
नरेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती ने दशकों तक नक्सली हिंसा का भयावह दौर देखा है। निर्दोष ग्रामीणों की हत्या, आदिवासियों पर अत्याचार और सुरक्षाबलों के जवानों के बलिदान की लंबी पीड़ा आज भी प्रदेश की स्मृतियों में जिंदा है। ऐसे समय में देश के पूर्व गृह मंत्री का कथित रूप से “वैचारिक नक्सलियों” के समर्थन पर गर्व जताना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है।
सत्ता में नाकामी, सत्ता से बाहर नक्सलियों के प्रति सहानुभूति?
गुप्ता ने पी. चिदंबरम के केंद्रीय गृह मंत्री के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की तत्कालीन नक्सल नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस दौर में चिदंबरम देश के गृह मंत्री थे, उसी दौरान देश ने नक्सली हिंसा की कई भयावह घटनाएं देखीं। दंतेवाड़ा के ताड़मेटला में सुरक्षाबलों की बड़ी शहादत ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
गुप्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में नक्सलवाद के खिलाफ नीति में स्पष्टता और कठोरता का अभाव रहा, जिसका खामियाजा छत्तीसगढ़ सहित देश के कई हिस्सों को भुगतना पड़ा।
उन्होंने कहा, “जब जिम्मेदारी हाथ में थी, तब नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पाए और आज सत्ता से बाहर होकर उन्हीं विचारों के प्रति सहानुभूति जताना कांग्रेस की दोहरी राजनीति को उजागर करता है।”
झीरम घाटी के शहीदों को कैसे भूल सकती है कांग्रेस?
नरेश चंद्र गुप्ता ने झीरम घाटी नक्सली हमले का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस को उन शहीद नेताओं और कार्यकर्ताओं के परिवारों का दर्द याद रखना चाहिए, जिन्होंने नक्सली हिंसा में अपने अपनों को खोया।
उन्होंने कहा कि झीरम घाटी जैसी त्रासदी ने छत्तीसगढ़ की राजनीति और समाज को गहरे जख्म दिए हैं। ऐसे में नक्सली विचारधारा के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी या सहानुभूति का संदेश प्रदेश की जनता स्वीकार नहीं करेगी।
गुप्ता ने कहा कि नक्सलवाद कोई “वैचारिक बहस” भर नहीं है, बल्कि बंदूक, हिंसा और निर्दोष लोगों की हत्या के जरिए लोकतंत्र को चुनौती देने वाली समस्या रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचार रखने की स्वतंत्रता है, लेकिन हिंसा और निर्दोषों की हत्या को किसी भी विचारधारा के नाम पर जायज नहीं ठहराया जा सकता।
“कांग्रेस को छत्तीसगढ़ की जनता से जवाब मांगना चाहिए”
भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को ऐसे बयानों से पहले छत्तीसगढ़ के उन परिवारों के बीच जाकर देखना चाहिए, जिन्होंने नक्सली हिंसा में अपने बेटे, पति, पिता या भाई खोए हैं।
उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद की भयावहता से बाहर निकलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में नक्सली विचारधारा के प्रति सहानुभूति का कोई भी संकेत प्रदेश की शांति और सुरक्षा के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।”
गुप्ता ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई चाहती है, न कि नक्सली विचारधारा के समर्थन में बयान। उन्होंने कहा कि शहीद जवानों और नक्सली हिंसा के पीड़ित परिवारों के सम्मान के लिए हर राष्ट्रवादी शक्ति को एकजुट होकर हिंसा की विचारधारा के खिलाफ खड़ा होना होगा।
उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि “क्या नक्सली हिंसा में शहीद हुए जवानों और मारे गए निर्दोष आदिवासियों के परिवारों के सामने भी कांग्रेस अपने इस कथित समर्थन को सही ठहरा पाएगी?”
नरेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता अब सब देख और समझ रही है। नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में सुरक्षा बलों के साथ खड़ा होना ही प्रदेश के शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
