रायपुर – रायपुर कमिश्नरेट पुलिस ने Wash & Wash/Black Currency Scam के एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह वर्ष 2005 से सक्रिय था और देश के अलग-अलग राज्यों में 100 से अधिक लोगों को रकम दोगुनी करने तथा काले नोटों को केमिकल के जरिए असली भारतीय मुद्रा में बदलने का झांसा देकर अरबों रुपये की ठगी कर चुका है।
पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। आरोपियों को महाराष्ट्र के पुणे स्थित खंडाला के एक रिसॉर्ट से रंगे हाथों पकड़ा गया, जहां वे वाराणसी निवासी एक व्यक्ति को रकम दोगुनी करने का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे थे।

रायपुर में भी 1.13 करोड़ की ठगी
थाना तेलीबांधा के अपराध क्रमांक 330/26 में आरोपियों ने रायपुर के एक व्यक्ति को अपना शिकार बनाकर करीब 1.13 करोड़ रुपये की ठगी की थी। मामले में पुलिस ने पूर्व में दो महिला आरोपियों को नागपुर से गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ और जब्त मोबाइल फोन की तकनीकी जांच के दौरान गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले।
साइबर टीम ने मोबाइल चैट, संपर्क नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया। इसके बाद पुलिस ने गिरोह के सदस्यों को पुणे में लोकेट किया।
एक सप्ताह तक निगरानी, रिसॉर्ट में मारा छापा
पुलिस टीम तत्काल पुणे रवाना हुई और करीब एक सप्ताह तक आरोपियों की गतिविधियों तथा संभावित ठिकानों पर निगरानी रखी। इनपुट के आधार पर खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट में रेड की गई।
रेड के दौरान पुलिस को 7 आरोपी मौके पर मिले। आरोपी वाराणसी के एक व्यक्ति को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर रिसॉर्ट में बुला चुके थे। पीड़ित करोड़ों रुपये लेकर वहां पहुंचा था और लालच में रकम आरोपियों को सौंप चुका था। इसी दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को ठगी करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
4 करोड़ से अधिक नकदी समेत बड़ी मात्रा में सामान जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 4 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, 17 मोबाइल फोन, नोट के आकार का काला पेपर, कांच की प्लेट्स, अन्य सामग्री और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। सभी 7 आरोपियों को पुणे से ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया है।

इससे पहले गिरफ्तार की गईं दो महिला आरोपियों समेत मामले में अब तक कुल 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरोह से जुड़े अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
तीन आरोपी गिरोह के मुख्य कर्ताधर्ता
पुलिस के अनुसार ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी और मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर गिरोह के प्रमुख सदस्य और मुख्य कर्ताधर्ता हैं।
प्रवीण कुमार गिरोह में “कैप्टन” की भूमिका निभाता था, जबकि मनोज कुमार को “बड़े सर” के नाम से संबोधित किया जाता था। गिरोह के अन्य सदस्यों को भी अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं और ठगी से हासिल रकम का आपस में प्रतिशत के आधार पर बंटवारा किया जाता था।
5 स्टार होटलों में बनाते थे शिकार
जांच में सामने आया कि गिरोह लोगों को दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, आगरा, राजस्थान, गुजरात और नागपुर समेत विभिन्न शहरों के महंगे एवं 5 स्टार होटलों में बुलाता था। वहां आरोपी स्वयं को प्रभावशाली व्यक्तियों, बड़े नेताओं और विदेशी निवेशकों से जुड़ा हुआ बताकर पीड़ितों का विश्वास जीतते थे।
पीड़ितों को प्रभावित करने के लिए नेताओं और फिल्मी कलाकारों के साथ फोटो भी दिखाए जाते थे। मुख्य आरोपी निजी गनमैन तक रखते थे, ताकि पीड़ितों पर प्रभाव और दबाव बनाया जा सके।
केमिकल के नाम पर रची जाती थी ठगी की पूरी साजिश
गिरोह का मुख्य तरीका Wash & Wash/Black Currency Scam था। आरोपी पहले नकली केमिकल और विशेष प्रक्रिया का प्रदर्शन करते थे। वे दावा करते थे कि काले रंग से ढके नोटों को विशेष केमिकल और विदेशी तकनीक के माध्यम से असली भारतीय मुद्रा में बदला जा सकता है।
पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए पहले से तैयार असली नोटों का इस्तेमाल कर नकली प्रक्रिया का प्रदर्शन किया जाता था। इसके बाद विदेशी केमिकल, हाई-पावर केमिकल, विदेशी परीक्षण, सुरक्षा मंजूरी, अधिकारियों की अनुमति और फंड रिलीज जैसी अलग-अलग औपचारिकताओं का हवाला देकर पीड़ित से लगातार अलग-अलग किश्तों में रकम वसूली जाती थी।
2005 से चला रहे थे ठगी का नेटवर्क
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने छत्तीसगढ़, नोएडा, पुणे, बड़ौदा, उदयपुर और दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है। पुलिस के मुताबिक गिरोह वर्ष 2005 से सक्रिय था और अब तक 100 से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाकर अरबों रुपये की ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
आरोपी स्वयं को कथित रूप से “डी ग्रुप कंपनी (दाऊद ग्रुप)” से जुड़ा बताकर पीड़ितों पर प्रभाव जमाने का प्रयास करते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के प्रमुख सदस्य पूर्व में भी ठगी के मामलों में मुंबई और वाराणसी में जेल जा चुके हैं।
गिरफ्तार आरोपी
ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, उम्र 46 वर्ष, हरियाणा निवासी।
प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी, उम्र 52 वर्ष, वाराणसी निवासी।
मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर, उम्र 55 वर्ष, वाराणसी निवासी।
विवेक सिंह, उम्र 48 वर्ष, वाराणसी निवासी।
शुभम पांडेय, उम्र 37 वर्ष, जौनपुर निवासी, वर्तमान में मुंबई।
योगेन्द्र चौहान, उम्र 48 वर्ष, जौनपुर निवासी।
बालमुकुंद दीक्षित, उम्र 40 वर्ष, जौनपुर निवासी।
पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 330/26, धारा 318(4), 61(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश और ठगी की अन्य वारदातों के संबंध में विस्तृत जांच जारी है।
