रायपुर – पर्यावरण संरक्षण और क्षतिपूरक वनीकरण के नाम पर इस्तेमाल होने वाले कैंपा फंड से सरकारी वाहनों की खरीदी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। वर्ष 2020 में सामने आए इस मामले में 35 शासकीय वाहनों की खरीदी को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जहां नियमों के मुताबिक वाहनों को किराये या लीज पर लेने का प्रावधान था, वहीं विभागीय स्तर पर निधि से सीधे नई गाड़ियां खरीद ली गईं।
मामला अब केवल गाड़ियों की खरीदी तक सीमित नहीं है, बल्कि फंड के कथित उपयोग और नियमों की अनदेखी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायत के मुताबिक, करीब 4.61 करोड़ रुपये की वाहनों की खरीदी की गई। इनमें रायपुर वनमंडल द्वारा कंपनी को महिंद्रा स्कॉर्पियो, बोलेरो और अन्य वाहनों के लिए करीब 3.67 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का भी उल्लेख है।

नियम कुछ और, खरीदी कुछ और?
शिकायत में कहा गया है कि 29 जनवरी 2015 के दिशा-निर्देशों में वन कार्यों के लिए ट्रक, कार या वाहन को किराये अथवा लीज पर लेने का प्रावधान था। इसके बावजूद वर्ष 2020 में तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी की ओर से 35 वाहनों की खरीदी का आदेश जारी किया गया।
यही वह बिंदु है, जिसने पूरे मामले को सवालों के घेरे में ला दिया है—जब किराये या लीज का रास्ता नियमों में मौजूद था, तो करोड़ों रुपये खर्च कर स्थायी रूप से वाहन खरीदने की जरूरत क्यों पड़ी?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनी थी व्यवस्था
शिकायतकर्ता ने इस मामले को लेकर केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), नई दिल्ली में शिकायत दर्ज कराने और जांच की मांग किए जाने का भी उल्लेख किया है। शिकायत के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद व्यवस्था में बदलाव किया गया था और विकास कार्यों में वन भूमि के उपयोग से हुए नुकसान की भरपाई के लिए इस फंड का इस्तेमाल किया जाना था।
अब सवाल यह है कि क्या 35 वाहनों की खरीदी इसी उद्देश्य के अनुरूप थी? अगर हां, तो इसके लिए अपनाई गई प्रक्रिया क्या थी और किराये/लीज के बजाय खरीदी का फैसला किस आधार पर लिया गया?
अब अधिकारी के जवाब से भी बढ़ी तस्वीर साफ होने की उम्मीद
इस मामले में कैंपा छत्तीसगढ़ की सीईओ शालिनी रैना से जब मामले को लेकर जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें फिलहाल मामले की जानकारी नहीं है। दस्तावेजों को देखने के बाद ही वे इस संबंध में कुछ बता पाएंगी।
फाइल खुले तो सामने आए कई सवाल!
मामले में शिकायतकर्ता ने निविदा प्रक्रिया, दर निर्धारण, प्रतिस्पर्धी दर, तुलनात्मक विवरण, आपूर्ति आदेश और भुगतान प्रक्रिया की जांच की मांग की है। साथ ही वाहनों के वास्तविक उपयोग की भी जांच की बात कही गई है।
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है। कैंपा फंड पर्यावरण और वनीकरण के लिए था या फिर करोड़ों की गाड़ियों की खरीदी के लिए?
शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
