छत्तीसगढ़ – राजधानी रायपुर में मोबाइल लूट और चोरी की वारदातों को अंजाम देकर उन्हें दूसरे राज्यों में खपाने वाले एक बड़े अंतर्राज्यीय सिंडिकेट का कबीर नगर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस की कार्रवाई में रायपुर, ओडिशा और राजस्थान से कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर लगभग 100 मोबाइल चोरी एवं लूट की घटनाओं का खुलासा हुआ है। आरोपियों के कब्जे और निशानदेही से 14 मोबाइल फोन और 2 लैपटॉप भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस उपायुक्त वेस्ट जोन रॉबिन्सन गुड़िया के निर्देशन और अपर पुलिस उपायुक्त राहुल देव शर्मा के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान यह कार्रवाई की गई। पुलिस ने इस मामले में सिर्फ मोबाइल लूटने वालों को ही नहीं पकड़ा, बल्कि चोरी के मोबाइल को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने, उनका लॉक तोड़ने, पहचान बदलने और फिर बाजार में बेचने वाली पूरी श्रृंखला को ट्रेस किया।
CCTV के एक फुटेज ने खोली गिरोह की पहली कड़ी
मोबाइल लूट और चोरी की घटनाओं की जांच के दौरान कबीर नगर पुलिस और साइबर टीम ने घटनास्थलों के आसपास लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगाले। इसी दौरान पुलिस को एक संदिग्ध चेहरा नजर आया, जिसकी पहचान शहजाद अली उर्फ भिंडी, निवासी रावाभाटा के रूप में हुई। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार किया।
पूछताछ में सामने आया कि शहजाद पहले भी मोबाइल लूट के मामले में जेल जा चुका है। पुलिस की पूछताछ आगे बढ़ी तो एक के बाद एक गिरोह की कड़ियां सामने आती चली गईं।
रायपुर से ओडिशा तक भेजे जाते थे लूटे हुए मोबाइल
शहजाद की निशानदेही पर पुलिस ने उसके साथियों कृष दीप और गौरव मझखंड को भी गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि रायपुर में लूटे और चोरी किए गए मोबाइल फोन स्थानीय बाजार में सीधे नहीं बेचे जाते थे। इन्हें बस और अन्य माध्यमों से ओडिशा के राजखरीयार क्षेत्र स्थित ग्राम तुकला तक पहुंचाया जाता था। यहां कथित तौर पर भोदेव मेहर मोबाइल दुकानदार के रूप में इन फोन को आगे खपाने का काम करता था।
सॉफ्टवेयर से खुलता था मोबाइल का लॉक
पुलिस के अनुसार, भोदेव मेहर मोबाइल दुकान की आड़ में चोरी और लूटे गए मोबाइलों का लॉक खोलने के लिए GSM Rex.com Unlock Tool जैसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता था। लॉक खुलने के बाद इन मोबाइलों को सेकंड हैंड फोन के रूप में ग्राहकों को बेच दिया जाता था।
जिन मोबाइलों का लॉक सामान्य सॉफ्टवेयर से नहीं खुलता था, उनमें खासकर कुछ iPhone और Samsung मॉडल, स्क्रैप से प्राप्त स्पेयर मदरबोर्ड लगाए जाने की बात भी पूछताछ में सामने आई है। इस प्रक्रिया के जरिए मोबाइल की मूल पहचान बदलकर उसे दोबारा बाजार में खपाने का प्रयास किया जाता था।
ओडिशा से कोटा तक पहुंचती थी नेटवर्क की कड़ी
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। जिन मोबाइलों का लॉक भोदेव मेहर नहीं खोल पाता था, उन्हें राजस्थान के कोटा निवासी आकाश परेटा तक भेजे जाने की जानकारी पुलिस को मिली। पुलिस के मुताबिक, आकाश ऐसे मोबाइलों का लॉक खोलने के बाद उन्हें आगे बाजार में बेचने में मदद करता था।
इस तरह रायपुर से चोरी या लूट हुआ मोबाइल पहले दूसरे शहरों के रास्ते ओडिशा पहुंचता, वहां उसकी पहचान बदलने की कोशिश होती और जरूरत पड़ने पर राजस्थान तक भेजा जाता था।
लुटेरे से लेकर अंतिम खरीदार तक पहुंची पुलिस की जांच
इस कार्रवाई की खास बात यह रही कि पुलिस ने जांच को केवल लूट की घटना और स्थानीय आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रखा। कबीर नगर थाना पुलिस और साइबर टीम ने तकनीकी विश्लेषण, CCTV फुटेज और फील्ड जांच के जरिए चोरी के मोबाइल की पूरी श्रृंखला को ट्रेस किया।
लूट की वारदात से लेकर मोबाइल की ढुलाई, लॉक खोलने, मदरबोर्ड बदलने और फिर बाजार में बेचने तक की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने तीन राज्यों तक फैले नेटवर्क के आरोपियों को गिरफ्तार किया।
14 मोबाइल और 2 लैपटॉप बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे एवं उनकी निशानदेही से अब तक 14 नग मोबाइल फोन और 2 लैपटॉप जब्त किए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से विस्तृत पूछताछ जारी है और अन्य चोरी एवं लूट की घटनाओं के संबंध में भी जांच की जा रही है। ऐसे में सामने आने वाले मामलों की संख्या और बढ़ सकती है।
गिरफ्तार आरोपी: शहजाद अली उर्फ भिंडी (32), गौरव मझखंड (26), कृष दीप (20), भोदेव मेहर (20) और आकाश परेटा (27) शामिल हैं।
इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी कबीर नगर गगन बाजपेयी, निरीक्षक चेतन चंद्राकर, उनि. लोकेश्वर सदावर्ति, सउनि. राजेंद्र पांडे, प्रधान आरक्षक अलोप राठौर, संजय सिंह तथा आरक्षक दीपक सिंह ठाकुर, मोहसिन खान, आशीष शुक्ला, शिवम द्विवेदी और अभिषेक सिंह का विशेष योगदान रहा।
