रायपुर/नवा रायपुर – छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और नवा रायपुर में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जोरा स्थित नवा रायपुर फ्लाईओवर ब्रिज पर रात करीब 2 बजे युवक-युवतियों की कथित शराब पार्टी का नजारा सामने आने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। बीच सड़क पर गाड़ियों के साथ जमावड़ा, गाड़ी के बोनट पर बीयर की पेटी और हाथों में शराब की बोतल व सिगरेट लिए युवाओं की गतिविधियां कैमरे में कैद होने का दावा किया गया है।

गाड़ी का बोनट बना बार, सड़क पर बेखौफ पार्टी!
मिली जानकारी के अनुसार, जोरा फ्लाईओवर ब्रिज पर देर रात युवक-युवतियों का एक समूह कथित तौर पर शराब पार्टी करता नजर आया। गाड़ी के बोनट पर बीयर की पेटी रखी होने और युवाओं के शराब व सिगरेट का सेवन करने का दृश्य सामने आने की बात कही जा रही है। सड़क पर इस तरह का जमावड़ा न केवल यातायात और सुरक्षा के लिहाज से चिंता पैदा करता है, बल्कि दूसरे वाहन चालकों के लिए भी खतरा बन सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो हमारी टीम के कैमरे में रिकॉर्ड होने का दावा है। बताया गया है कि जब हमारी टीम मौके पर पहुंची, तो वहां मौजूद युवक-युवतियां इधर-उधर भागते नजर आए। अब सवाल यह है कि यदि यह सार्वजनिक स्थान पर शराबखोरी का मामला है, तो मौके पर मौजूद लोगों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
मंदिर हसौद थाना क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
बताया जा रहा है कि यह मामला ग्रामीण क्षेत्र के मंदिर हसौद थाना क्षेत्र से जुड़ा है। ऐसे में स्थानीय पुलिस की रात्रिकालीन गश्त और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। रात के तीन बजे तक यदि किसी सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की गतिविधियां चल रही थीं, तो क्या संबंधित पुलिस टीम को इसकी जानकारी थी? क्या नियमित पेट्रोलिंग की जा रही थी? और क्या इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच होगी?
नवा रायपुर में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद ऐसी गतिविधियों के सामने आने पर निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता की समीक्षा जरूरी है। हालांकि, पुलिस की भूमिका, गश्त की स्थिति और कार्रवाई को लेकर संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

नशे के बाद हादसे और मारपीट का खतरा
नवा रायपुर में देर रात होने वाली कथित शराब पार्टियों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं गंभीर हैं। नशे की हालत में वाहन चलाना सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ाता है। इसी तरह शराब के नशे में विवाद, मारपीट और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
यदि ऐसे स्थानों पर नियमित जांच नहीं होती, तो असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाना मुश्किल हो सकता है। पुलिस और यातायात विभाग को संवेदनशील स्थानों पर रात्रिकालीन गश्त, संदिग्ध वाहनों की जांच और नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाने की जरूरत है।
ढाबों, होटलों और क्लबों की समय-सीमा पर भी निगरानी जरूरी
नवा रायपुर और आसपास के इलाकों में देर रात तक चलने वाली पार्टियों, ढाबों, होटलों और क्लबों की गतिविधियों को लेकर भी निगरानी की मांग उठ रही है। संबंधित प्रतिष्ठानों के लिए निर्धारित समय-सीमा और शराब परोसने के नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। पुलिस के साथ आबकारी विभाग को भी अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार जांच और कार्रवाई करनी चाहिए।
गाड़ी नंबर CG 04 RA 5577 की जांच होगी?
इस घटनाक्रम में CG 04 RA 5577 नंबर की गाड़ी का उल्लेख किया गया है। पुलिस इस वाहन की पहचान, मौके पर उसकी मौजूदगी और घटना से उसके संबंध की जांच कर सकती है। केवल वाहन नंबर सामने आने से वाहन मालिक या किसी व्यक्ति की संलिप्तता साबित नहीं होती। इसलिए निष्पक्ष जांच और उपलब्ध वीडियो फुटेज के आधार पर तथ्यों की पुष्टि जरूरी है।

अब पुलिस और आबकारी विभाग से सीधे सवाल
क्या मंदिर हसौद थाना पुलिस इस कथित शराब पार्टी की जांच करेगी? क्या वायरल या रिकॉर्ड किए गए वीडियो की पड़ताल कर संबंधित लोगों की पहचान की जाएगी? क्या सीसीटीवी फुटेज खंगाली जाएगी? और क्या देर रात सार्वजनिक स्थानों पर शराबखोरी तथा नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा?
सवाल सिर्फ एक रात की पार्टी का नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और कानून के पालन का है। यदि नियम आम नागरिकों पर लागू होते हैं, तो देर रात सड़क पर कथित शराबखोरी करने वालों पर भी निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। अब देखना होगा कि संबंधित पुलिस और आबकारी विभाग इस मामले को गंभीरता से लेकर जांच करते हैं या यह मामला भी सवालों के बीच ही दबकर रह जाता है।
