रायपुर – छत्तीसगढ़ में विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर एक बार फिर सामने आ गया है। कवर्धा जिले के दलदली से मेन रोड खरिया होते हुए अगरी (बी) तक प्रधानमंत्री जनमन सड़क योजना के तहत करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई सड़क पहली ही बारिश में बुरी तरह उखड़ने लगी है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह सड़क प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) से जुड़े विभागीय मंत्री विजय शर्मा के गृह निर्वाचन क्षेत्र में स्थित है। ऐसे में सड़क की बदहाल स्थिति ने न सिर्फ निर्माण गुणवत्ता बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिस सड़क को वर्षों तक ग्रामीणों की जीवनरेखा बनना था, वह निर्माण के महज दो महीने के भीतर ही जगह-जगह से उखड़ने लगी। बारिश के बाद सड़क की ऊपरी परत निकल गई, गिट्टियां बाहर आ गईं और कई हिस्सों में डामर बह गया। ग्रामीणों का कहना है कि पहली ही बारिश में सड़क का यह हाल हो जाना इस बात का प्रमाण है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान मानकों का पालन नहीं किया गया। यदि निर्माण कार्य तकनीकी मानकों के अनुसार होता तो करोड़ों की लागत से बनी सड़क पहली ही बरसात में दम नहीं तोड़ती। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार विकास की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद टिकाऊ सड़क तक नहीं बन पा रही है।
यह मामला इसलिए भी चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि संबंधित विभाग का दायित्व स्वयं मंत्री विजय शर्मा के पास है और सड़क उनके गृह निर्वाचन क्षेत्र में ही बनाई गई है। ऐसे में विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मुद्दा मिल गया है। राजनीतिक गलियारों में भी यह सवाल उठ रहा है कि यदि मंत्री के अपने क्षेत्र में ही सड़क की यह स्थिति है तो प्रदेश के दूर-दराज़ इलाकों में बनने वाली सड़कों की गुणवत्ता कैसी होगी?
ग्रामीणों ने सड़क की तत्काल तकनीकी जांच कराने और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में भी सरकारी धन इसी तरह बर्बाद होता रहेगा।
हालांकि विभाग ने सड़क खराब होने के पीछे अलग वजह बताई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के एसडीओ नमन देशमुख ने फोन पर बताया कि यह सड़क 12 टन क्षमता के अनुसार बनाई गई है, लेकिन इस मार्ग पर क्षमता से अधिक वजन वाले ट्रक लगातार चल रहे हैं। उनके अनुसार ओवरलोड वाहनों के कारण सड़क को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अधिक भार लेकर चलने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी ताकि सड़क को और नुकसान न पहुंचे।
लेकिन विभाग का यह तर्क भी कई सवाल छोड़ जाता है। यदि इस मार्ग पर लंबे समय से भारी वाहन चल रहे थे तो क्या विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी? यदि थी, तो ओवरलोडिंग रोकने के लिए पहले से कोई व्यवस्था क्यों नहीं की गई? और यदि सड़क क्षेत्र की वास्तविक यातायात आवश्यकता को ध्यान में रखकर नहीं बनाई गई, तो क्या योजना और डिजाइन में ही गंभीर चूक हुई?
जानकारों का मानना है कि किसी भी सड़क का निर्माण स्थानीय परिस्थितियों, संभावित यातायात और भार क्षमता को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। यदि सड़क इतनी जल्दी उखड़ रही है तो इसकी स्वतंत्र तकनीकी जांच आवश्यक है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दोष निर्माण गुणवत्ता का है, डिजाइन का है या फिर वास्तव में ओवरलोडिंग इसका प्रमुख कारण है।
फिलहाल करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह सड़क पहली बारिश में ही सवालों के घेरे में है। विकास के दावों के बीच उखड़ती सड़क की तस्वीरें सरकार के दावों को चुनौती देती नजर आ रही हैं। अब लोगों की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इस मामले में केवल सफाई देती है या फिर निर्माण की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर ठोस कार्रवाई भी करती है।
