संवाददाता – संजू गुप्ता
कवर्धा – दलदली मेन रोड से खारिया होते हुए अगरी (बी) तक प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बनी सड़क के पहली ही बारिश में उखड़ने और धंसने का मामला सामने आने के बाद शासन ने सख्त रुख अपनाया है। सड़क की बदहाली की तस्वीरें सामने आने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया और आखिरकार सरकार को तत्काल राज्य स्तरीय जांच करानी पड़ी। जांच के बाद निर्माण कार्यों में लापरवाही और मॉनिटरिंग में गंभीर चूक सामने आने पर दो इंजीनियरों को तत्काल निलंबित कर दिया गया, जबकि कार्यपालन अभियंता के निलंबन का प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
दरअसल, करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह सड़क पहली ही बारिश में जगह-जगह से धंस गई थी। सड़क की परत उखड़ गई, किनारे टूट गए और एक भारी वाहन सड़क धंसने के कारण फंस गया था। इस पूरे मामले को लेकर सवाल उठने लगे कि आखिर नई सड़क इतनी जल्दी कैसे जवाब दे गई। मामला चर्चा में आने के बाद उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री विजय शर्मा ने तत्काल उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए।

इसी क्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह स्वयं गुरुवार को मौके पर पहुंचे और सड़क का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सड़क की कोर कटिंग कराकर गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कराई गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सड़क को नुकसान पहुंचने के पीछे दो प्रमुख कारण रहे—सड़क की निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक भार वाले वाहनों का संचालन और शोल्डर निर्माण में तकनीकी खामियां।
जांच में सामने आया कि यह सड़क केवल 10 से 12 टन क्षमता वाले वाहनों के लिए बनाई गई थी, लेकिन इस पर 60 से 70 टन तक रेत लेकर चलने वाले भारी ट्रक लगातार गुजर रहे थे। इससे सड़क पर अत्यधिक दबाव पड़ा और बारिश के दौरान शोल्डर से पानी सड़क की निचली सतह तक पहुंच गया, जिससे सड़क का बेस कमजोर हो गया और कई स्थानों पर सड़क धंस गई।

हालांकि तकनीकी जांच में यह भी सामने आया कि सड़क की जीएसबी, डब्ल्यूबीएम तथा बिटुमिनस परतों की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप थी। बाइंडर कंटेंट परीक्षण में भी 6 प्रतिशत परिणाम मिला, जो तकनीकी मानकों के अनुरूप पाया गया। लेकिन शोल्डर का कॉम्पैक्शन निर्धारित 100 प्रतिशत मानक से कम पाया गया। आरडी 1400 मीटर पर यह 95 प्रतिशत और आरडी 2100 मीटर पर केवल 94.68 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके अलावा एक पुलिया के एप्रोच पर बैकफिलिंग का कार्य भी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार इन्हीं तकनीकी खामियों के कारण बारिश का पानी सड़क के भीतर पहुंचा और सड़क धंसने लगी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर सचिव भीम सिंह ने निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में लापरवाही बरतने वाले सहायक अभियंता सौरभ देशमुख तथा उप अभियंता जे. रितेश नायडू को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। वहीं कार्यपालन अभियंता संतोष कुमार ठाकुर के निलंबन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा संबंधित निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी दिए गए।
सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से को पूरी तरह उखाड़कर दोबारा बनाया जाए और पूरे मार्ग के शोल्डर का गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा न बने।
सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी बड़ा निर्णय लिया है। सचिव भीम सिंह ने कहा कि इस सड़क पर क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। परिवहन, पुलिस और राजस्व विभाग संयुक्त अभियान चलाकर ओवरलोड वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।

यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सड़क की बदहाल तस्वीरें सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे थे। शासन की त्वरित कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में लापरवाही करने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों को बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल, करोड़ों की सड़क पर उठे सवालों के बीच सरकार की सख्त कार्रवाई ने इस पूरे मामले को प्रदेश की सबसे चर्चित प्रशासनिक कार्रवाई में बदल दिया है।
