रायपुर – छत्तीसगढ़ के चिकित्सा शिक्षा विभाग में हाल ही में जारी हुए बड़े तबादला आदेश के बाद अब विभाग के भीतर नया विवाद खड़ा हो गया है। 25 जून 2026 को जारी आदेश के तहत सह प्राध्यापक (Associate Professor) से प्राध्यापक (Professor) पद पर पदोन्नति के बाद विभिन्न शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में बड़ी संख्या में डॉक्टरों की नई पदस्थापना की गई थी। आदेश जारी होने के बाद कई डॉक्टरों ने अपनी पुरानी पदस्थापना से कार्यमुक्त होकर नए मेडिकल कॉलेजों में योगदान भी दे दिया है। लेकिन अब आरोप है कि कुछ प्रभावशाली डॉक्टर अपनी नई पोस्टिंग पर जाने के बजाय तबादला रुकवाने के लिए सत्ता के गलियारों में सक्रिय हो गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक डॉ. जैन, डॉ. बंसल, डॉ. पाटिल जैसे आधा दर्जन से अधिक डॉक्टरों ने अपने तबादले पर रोक लगाने के लिए आवेदन तैयार कर चिकित्सा शिक्षा मंत्री तक पहुंच बना ली है। चर्चा यह भी है कि मंत्री के सरकारी बंगले में लगातार सिफारिशों का दौर चल रहा है और इस पूरे मामले में भारी-भरकम रकम की सौदेबाजी होने की बातें विभागीय गलियारों में जोर-शोर से तैर रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही सरकार या मंत्री की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
ईमानदारी से जॉइन करने वाले डॉक्टरों में नाराजगी
सबसे ज्यादा नाराजगी उन डॉक्टरों में देखी जा रही है जिन्होंने शासन के आदेश का पालन करते हुए बिना किसी दबाव या सिफारिश के नई पदस्थापना में योगदान दे दिया। उनका कहना है कि यदि शासन ने सभी का स्थानांतरण किया है तो फिर कुछ चुनिंदा लोगों को राहत देने की कोशिश क्यों हो रही है?
एक वरिष्ठ डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “जब हमने परिवार, बच्चों की पढ़ाई और व्यक्तिगत परेशानियों के बावजूद आदेश का पालन कर नई जगह जॉइन कर लिया तो कुछ लोगों के लिए अलग नियम क्यों बनाए जा रहे हैं? यदि ट्रांसफर रुकते हैं तो यह सीधे-सीधे भेदभाव होगा।”
हाईकोर्ट जाने की तैयारी
सूत्रों का दावा है कि यदि कुछ डॉक्टरों के तबादले निरस्त किए जाते हैं या उन्हें वर्तमान पदस्थापना में बनाए रखा जाता है तो पहले ही नई जगह कार्यभार संभाल चुके डॉक्टर इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
नाराज डॉक्टरों का कहना है कि शासन के आदेश सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। यदि प्रभाव और सिफारिश के आधार पर आदेश बदले जाते हैं तो इससे पूरी तबादला प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होंगे।

25 जून को जारी हुआ था बड़ा आदेश
चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में सह प्राध्यापक से प्राध्यापक पद पर पदोन्नति देते हुए विभिन्न विभागों के डॉक्टरों की नई पदस्थापना की गई थी। इनमें कम्युनिटी मेडिसिन, फॉरेंसिक मेडिसिन, फार्माकोलॉजी, शिशु रोग, रेडियोथेरेपी, बायोकेमिस्ट्री, ईएनटी, त्वचा एवं यौन रोग, प्लास्टिक सर्जरी समेत कई विभागों के डॉक्टर शामिल हैं।
आदेश के अनुसार सभी अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश भी दिए गए थे। साथ ही स्पष्ट किया गया था कि समय सीमा में कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर अगली कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।
क्या चल रहा है पर्दे के पीछे?
विभागीय सूत्र बताते हैं कि कुछ डॉक्टर अपने पसंदीदा मेडिकल कॉलेज में ही बने रहने के लिए लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि आवेदन तैयार कराए गए हैं और प्रभावशाली लोगों के जरिए तबादला रुकवाने की कोशिश जारी है।
इसी बीच यह चर्चा भी तेज है कि पूरे मामले में आर्थिक लेन-देन की संभावनाओं को लेकर विभाग के भीतर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। हालांकि इन दावों के समर्थन में अभी तक कोई आधिकारिक दस्तावेज या प्रमाण सार्वजनिक नहीं हुआ है।
