रायपुर – छत्तीसगढ़ की नई विधानसभा को लेकर एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में लोक निर्माण विभाग (PWD) के जवाब ने सरकार और निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में नए विधानसभा भवन के बिल्डिंग उपयोगिता प्रमाण पत्र (Building Occupancy/Usability Certificate) और परिसर में लगाए गए गार्डन डेवलपमेंट कार्य की निविदा के बाद जारी कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) की प्रतियां मांगी गई थीं। लेकिन विभाग ने जो जवाब दिया, उसने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया।
RTI आवेदक राकेश चौबे ने लोक निर्माण विभाग से जानकारी मांगी थी कि 1 नवंबर 2025 को लोकार्पित किए गए नए विधानसभा भवन का निर्माण पूरा होने के बाद जारी उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाए। साथ ही विधानसभा परिसर में गार्डन डेवलपमेंट से संबंधित कार्यादेश की प्रति भी मांगी गई।
इस आवेदन को पहले अधीक्षण अभियंता कार्यालय से कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग, संभाग क्रमांक-3, नया रायपुर को स्थानांतरित किया गया। इसके बाद 7 जुलाई 2026 को जनसूचना अधिकारी द्वारा जो जवाब दिया गया, वह चौंकाने वाला है।
PWD का जवाब: उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी ही नहीं किया गया
जनसूचना अधिकारी ने स्पष्ट रूप से लिखा कि “बिल्डिंग उपयोगिता प्रमाण पत्र संबंधी कोई दस्तावेज जारी नहीं किया जाता, इसलिए जानकारी उपलब्ध कराना संभव नहीं है।”
यानी रजत जयंती के समारोह के अवसर पर नवा रायपुर के जिस भवन का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और संवैधानिक पदाधिकारियों की मौजूदगी में किया गया, उस भवन के उपयोग से पहले आवश्यक माने जाने वाले उपयोगिता प्रमाण पत्र के संबंध में विभाग के पास कोई जारी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।

गार्डन डेवलपमेंट पर भी विभाग का जवाब चौंकाने वाला
RTI में विधानसभा परिसर के गार्डन डेवलपमेंट के लिए निविदा के बाद जारी कार्यादेश की प्रति भी मांगी गई थी। इस पर भी विभाग ने जवाब दिया कि यह निविदा इस कार्यालय द्वारा जारी नहीं की गई, इसलिए कार्यादेश की प्रति उपलब्ध कराना संभव नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि संबंधित कार्यालय ने कार्यादेश जारी नहीं किया, तो आखिर यह कार्य किस एजेंसी या किस विभाग के माध्यम से कराया गया?
लोकार्पण पहले, दस्तावेज बाद में?
नया विधानसभा भवन राज्य की सबसे महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों में से एक है। यदि RTI के जवाब को आधार माना जाए तो यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या बिना उपयोगिता प्रमाण पत्र के ही भवन का लोकार्पण और उपयोग शुरू कर दिया गया?
निर्माण कार्यों में सामान्यतः भवन के उपयोग से पहले संबंधित तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा मानकों की पुष्टि और आवश्यक प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया पूरी की जाती है। ऐसे में RTI के जवाब ने पूरे मामले पर नई बहस छेड़ दी है।
विभाग को देना होगा जवाब
यह मामला केवल एक भवन का नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की लागत से बने प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक संस्थान का है। यदि विभाग के रिकॉर्ड में उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है, तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि भवन का उपयोग किन औपचारिकताओं के आधार पर शुरू किया गया। इसी प्रकार गार्डन डेवलपमेंट कार्य से संबंधित वर्क ऑर्डर उपलब्ध न होना भी प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
अब यह मामला केवल RTI तक सीमित नहीं रह गया है। विपक्ष, जनप्रतिनिधि और नागरिक समाज इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच की मांग कर सकते हैं। यदि दस्तावेज वास्तव में मौजूद नहीं हैं, तो यह गंभीर प्रशासनिक चूक का मामला हो सकता है, और यदि दस्तावेज मौजूद हैं लेकिन उपलब्ध नहीं कराए गए, तो सूचना के अधिकार अधिनियम की भावना पर भी सवाल उठेंगे।
