रायपुर – छत्तीसगढ़ में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में वन विभाग ने एक नई पहल की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की परिकल्पना, वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडे के मार्गदर्शन में संचालित “हरियर छत्तीसगढ़” अभियान के तहत अब राजधानी रायपुर के नागरिकों को उनके वार्डों में ही नि:शुल्क पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।
वनमंडलाधिकारी, रायपुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और प्रकृति के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करना भी है। विभाग का मानना है कि यदि प्रत्येक नागरिक एक पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करे, तो आने वाले वर्षों में रायपुर का हरित क्षेत्र उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है।

इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए नगर पालिक निगम रायपुर के सभी 70 वार्डों में छायादार, फलदार और ऑक्सीजन प्रदान करने वाले पौधों का नि:शुल्क वितरण किया जाएगा। इससे शहर के नागरिकों को अपने घर, आंगन, मोहल्ले और सार्वजनिक स्थानों पर पौधारोपण के लिए प्रेरित किया जाएगा। अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने का भी प्रयास किया जा रहा है।
वन विभाग ने इस विशेष अभियान के लिए “सेवर्स ए.टी.एम.” नामक चलित पौधा वितरण वाहन की शुरुआत की है। इस वाहन को वन मंत्री केदार कश्यप ने नया रायपुर (अटल नगर) स्थित अन्त्यो शासकीय आवासीय परिसर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर रायपुर वनमंडल द्वारा पौधों के नि:शुल्क वितरण अभियान का औपचारिक शुभारंभ भी किया गया।
अधिकारियों के अनुसार यह चलित पौधा वितरण वाहन विभिन्न वार्डों में पहुंचकर नागरिकों को आसानी से पौधे उपलब्ध कराएगा, जिससे लोगों को नर्सरी तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अभियान के जरिए अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
वन विभाग ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इस पहल का अधिकतम लाभ उठाएं, अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी पौधारोपण के लिए प्रेरित करें तथा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल कर हरियाली बढ़ाने में सहभागी बनें। विभाग का विश्वास है कि जनसहभागिता के बल पर “हरियर छत्तीसगढ़” अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी और स्थायी कदम साबित होगा।
