छत्तीसगढ़ – कांकेर जिले में माओवादी डंप से बरामद नकदी को लेकर पुलिस विभाग से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। आमाबेड़ा क्षेत्र के जंगलों से बरामद करीब 20 लाख रुपये की राशि को लेकर दो DSP की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि बरामद रकम को सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय आपस में बांट लिया गया। हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच प्रक्रिया जारी है।
जानकारी के मुताबिक, आमाबेड़ा क्षेत्र के जंगलों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान माओवादी डंप से नकदी बरामद होने की बात सामने आई थी। बताया जा रहा है कि टोंडेमरका जंगल से करीब 15 लाख रुपये और मरकाकोनारी क्षेत्र से करीब 5 लाख रुपये बरामद हुए थे। इस तरह कुल रकम करीब 20 लाख रुपये बताई जा रही है।
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि बरामद राशि को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय संबंधित दो DSP ने कथित तौर पर आपस में बांट लिया। यदि आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह पुलिस विभाग की निर्धारित प्रक्रिया और सरकारी संपत्ति से जुड़े नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
SP की रिपोर्ट के बाद बढ़ी हलचल
मामले की शुरुआती जांच के बाद कांकेर SP निखिल राखेचा द्वारा अगस्त महीने में उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों के निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, मामले में विभागीय जांच के आदेश भी दिए जा सकते हैं। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि माओवादी डंप से बरामद नकदी को लेकर मौके से लेकर सरकारी रिकॉर्ड और खाते में जमा कराने तक कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई थी।
जांच पूरी होने के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल मामले में आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए दोनों DSP की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। उच्च अधिकारियों के निर्देश के बाद विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई तय होने की संभावना है।
माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों के दौरान बरामद नकदी और अन्य सामग्री को लेकर निर्धारित प्रक्रिया का पालन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में कांकेर का यह मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग के भीतर भी हलचल बढ़ गई है। अब निगाहें उच्च अधिकारियों के अगले कदम और जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं।
