जगदलपुर – छत्तीसगढ़ पुलिस कर्मचारी साख एवं कल्याण सहकारी समिति से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले को लेकर शनिवार को जगदलपुर के पत्रकार भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में गंभीर आरोप लगाए गए। सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक एम. सत्यदेव शर्मा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पर सवाल उठाते हुए CBI, CID या विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक की कार्रवाई एकतरफा और चयनात्मक रही है, जिससे पूरे प्रकरण की निष्पक्षता पर संदेह पैदा हो रहा है।
सत्यदेव शर्मा ने कहा कि मामले में दर्ज एफआईआर के आधार पर प्रआर-529 शिवकांत तिवारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जबकि उसी प्रकरण के आरोपी प्रआर-787 संजय सिंह चौहान के खिलाफ अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनके अनुसार एक आरोपी पर कठोर कार्रवाई और दूसरे के खिलाफ केवल औपचारिक कदम उठाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने दावा किया कि शिवकांत तिवारी को पर्याप्त जांच और ठोस साक्ष्यों के अभाव में गिरफ्तार किया गया, जबकि पूरे वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, चल-अचल संपत्तियों और कथित गबन की राशि की समग्र जांच अब तक नहीं हुई है। उनका कहना था कि जब तक सभी संबंधित व्यक्तियों की आर्थिक गतिविधियों और संपत्तियों की जांच नहीं होगी, तब तक वास्तविक दोषियों की पहचान संभव नहीं है।
पत्रकार वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2012 के बाद कर्मचारी साख एवं कल्याण सहकारी समिति का अनिवार्य ऑडिट नहीं कराया गया। जबकि नियमों के अनुसार समय-समय पर ऑडिट होना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये के लेन-देन के बावजूद ऑडिट नहीं होना अपने आप में गंभीर मामला है और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
सत्यदेव शर्मा ने समिति के तत्कालीन पदाधिकारियों, संजय सिंह चौहान और गणेश कश्यप की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति में आरडी, एफडी, बचत जमा, शेयर राशि, ऋण वितरण, गैस एजेंसी में निवेश और अन्य वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच के बिना पूरे घोटाले की सच्चाई सामने नहीं आ सकती। उन्होंने कथित रूप से अर्जित चल-अचल संपत्तियों की जांच कर गबन की राशि की वसूली करने की भी मांग उठाई।
उन्होंने यह भी कहा कि शिवकांत तिवारी के पास केवल पैतृक संपत्ति और सामान्य आवास है, जबकि अन्य आरोपियों की संपत्तियों की भी समान रूप से जांच होनी चाहिए। साथ ही गणेश कश्यप के कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने के मामले की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई।
सत्यदेव शर्मा ने आरोप लगाया कि शिवकांत तिवारी को सेवा के दौरान एक साथ कई शाखाओं का कार्यभार सौंपा गया था, लेकिन पूरे मामले के कथित मास्टरमाइंड की पहचान और भूमिका की अब तक निष्पक्ष जांच नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि CBI, CID या SIT जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ समान कार्रवाई हो।
पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 15 अगस्त 2026 तक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई और सभी आरोपियों के खिलाफ समान कार्रवाई नहीं हुई, तो 90 वर्षीय कलावती तिवारी, वंदना तिवारी, अर्पित तिवारी और अनुष्का तिवारी सहित पूरा परिवार जगदलपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने आत्मदाह करेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित जांच एजेंसियों की होगी।
