छत्तीसगढ़ – कांकेर जिले में मलेरिया से लगातार हो रही मौतों के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लेते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने पूरे मामले में दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

एनएचआरसी ने 31 जुलाई को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के आधार पर संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया था कि कांकेर जिले में मात्र 13 दिनों के भीतर मलेरिया से 5 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 28 जुलाई को एक 11 वर्षीय बालक की मौत भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चे की प्रारंभिक जांच एक निजी लैब में मलेरिया के लिए निगेटिव आई थी, लेकिन तबीयत बिगड़ने पर उसे अलबेलापारा अस्पताल ले जाया गया। दुर्भाग्यवश, अस्पताल में रक्त जांच रिपोर्ट में मलेरिया की पुष्टि होने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
आयोग ने कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में प्रकाशित तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर लापरवाही और मानवाधिकारों के उल्लंघन का संकेत देता है। इसी आधार पर राज्य सरकार से पूरे घटनाक्रम, उपचार व्यवस्था, जांच प्रक्रिया और उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी गई है।
उधर, राज्य स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर मलेरिया स्क्रीनिंग अभियान शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य टीमों द्वारा लोगों की जांच की जा रही है और मलेरिया से बचाव, समय पर जांच तथा उपचार के प्रति जागरूक किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और आवश्यक दवाओं व स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
अब सभी की नजरें राज्य सरकार की उस विस्तृत रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो अगले दो सप्ताह के भीतर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी जाएगी। यह रिपोर्ट तय करेगी कि मौतों के पीछे केवल बीमारी जिम्मेदार थी या स्वास्थ्य व्यवस्था की किसी गंभीर चूक ने इन जानों की कीमत चुकवाई।
