रायपुर – छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस इस बार केवल परंपरा और संस्कृति का उत्सव नहीं होगा, बल्कि बदलाव, आत्मनिर्भरता और नए जीवन की प्रेरक कहानी भी सामने आएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में बस्तर के बदलते स्वरूप की झलक 7 अगस्त को राजधानी रायपुर में आयोजित ‘स्वदेशी फैशन शो’ में देखने को मिलेगी, जहां सुकमा और बस्तर की 12 पुनर्वासित महिलाएं स्वदेशी कोसा एवं हाथकरघा वस्त्रों में रैंप पर उतरकर अपने आत्मविश्वास और नई पहचान का परिचय देंगी।
साइंस कॉलेज के समीप स्थित दीनदयाल ऑडिटोरियम में सुबह 11 बजे से आयोजित होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम की गरिमा विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव तथा छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष भोजराज देवांगन की उपस्थिति से और बढ़ेगी।

फैशन शो की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि रैंप पर उतरने वाली 30 मॉडलों में 12 महिलाएं वे हैं जिन्होंने इसी वर्ष मार्च या उसके बाद नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा को अपनाया है। हाथकरघा एवं कोसा वस्त्रों में उनका रैंप वॉक केवल फैशन का प्रदर्शन नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश होगा कि अवसर, सम्मान और विश्वास मिलने पर जीवन की नई शुरुआत संभव है। फैशन शो के बाद ये महिलाएं अपने अनुभव साझा करेंगी, जिससे समाज को सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा मिलेगी।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के नए प्रीमियम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ किया जाएगा। साथ ही संघ की नई इन्वेंटरी मैनेजमेंट प्रणाली का लोकार्पण, सम्मानित बुनकरों की डायरेक्ट्री तथा टाई-डाई (बांधनी) वस्त्रों पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी होगा। ग्रामोद्योग विभाग की स्वदेशी प्रदर्शनी और मोबाइल वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा।
राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर बुनकरों, विद्यार्थियों और शिल्पकारों के लिए करोड़ों रुपये की सहायता और प्रोत्साहन भी वितरित किया जाएगा। कक्षा 10वीं एवं 12वीं उत्तीर्ण 935 विद्यार्थियों को 81.83 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। 17 वरिष्ठ बुनकरों का सम्मान किया जाएगा तथा चार बुनकरों को प्रतिष्ठित राजराजेश्वरी करुणामाता हाथकरघा प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

इसके अलावा 49 बुनकरों को आवास निर्माण के लिए 36 लाख रुपये, पांच बुनकर समितियों को भवन निर्माण हेतु 24.66 लाख रुपये, 85 बुनकरों को उन्नत करघे एवं सहायक उपकरणों के लिए वित्तीय सहायता तथा 21 रेशम कृषकों को 15 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत हितग्राहियों को आर्थिक सहायता और हस्तशिल्प से जुड़े काष्ठ, लौह एवं बेलमेटल शिल्पकारों को आधुनिक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस का यह आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध हस्तकरघा परंपरा, स्वदेशी उत्पादों के संवर्धन और बस्तर में शांति, पुनर्वास तथा आत्मनिर्भरता की नई कहानी को एक साथ प्रस्तुत करेगा। यह कार्यक्रम इस बात का सशक्त संदेश देगा कि छत्तीसगढ़ अब विकास, विश्वास और अवसरों के साथ आगे बढ़ रहा है, जहां हुनर को सम्मान और नए सपनों को उड़ान मिल रही है।
