छत्तीसगढ़ – राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर रायपुर में ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने विकास, आत्मनिर्भरता और नए बस्तर की तस्वीर को एक मंच पर उतार दिया। कभी नक्सलवाद की राह पर चलीं और अब मुख्यधारा में लौट चुकीं सुकमा की पुनर्वासित महिलाओं ने मिस इंडिया फेमिना ईस्ट 2026 अनुष्का सोन के साथ स्वदेशी रैंप वॉक कर पूरे सभागार का दिल जीत लिया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच इन महिलाओं का आत्मविश्वास इस बात का संदेश दे गया कि अब बस्तर की पहचान बंदूक नहीं, बल्कि हुनर और स्वदेशी उत्पाद बन रहे हैं।

राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला से जुड़े हितग्राहियों और मेधावी विद्यार्थियों को 10.90 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता एवं पुरस्कार राशि वितरित की। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के नए प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ किया और इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर भी लॉन्च किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ के हथकरघा उत्पादों को “लोकल टू ग्लोबल” की पहचान दिलाना है। आधुनिक डिज़ाइन, ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और नए बाजारों के माध्यम से बुनकरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरक क्षण तब आया जब सुकमा की आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने कोसा सिल्क और हैंडलूम परिधानों में पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप वॉक किया। यह केवल फैशन शो नहीं था, बल्कि हिंसा से विकास, भय से विश्वास और अलगाव से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते नए बस्तर की जीवंत तस्वीर थी। मुख्यमंत्री ने महिलाओं से संवाद कर उनका उत्साह बढ़ाया। खास बात यह रही कि इनमें से अधिकांश महिलाएं पहली बार रायपुर पहुंची थीं और उनके लिए यह अनुभव जीवनभर की याद बन गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में बुनकरों और शिल्पकारों के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। 469 बुनकर परिवारों को आवास, 47 प्रदर्शनियों के माध्यम से लगभग 10 करोड़ रुपये की बिक्री, 2001 महिला स्व-सहायता समूहों को 68 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान तथा बुनकरों द्वारा निर्मित 436 करोड़ रुपये के वस्त्रों की सरकारी खरीदी जैसे निर्णयों ने इस क्षेत्र को नई मजबूती दी है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्वयं स्वदेशी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और हथकरघा स्टॉल से कोसा साड़ी खरीदकर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेश दिया। उन्होंने लोगों से “सेल्फी विद स्वदेशी” अभियान से जुड़ने और स्वदेशी उत्पादों की खरीद को जनआंदोलन बनाने की अपील भी की।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का यह आयोजन केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इसने यह संदेश दिया कि सुशासन, पुनर्वास और स्वदेशी की ताकत मिलकर समाज की तस्वीर बदल सकती है। सुकमा की महिलाओं का आत्मविश्वास से भरा रैंप वॉक इसी बदलते छत्तीसगढ़ और नए बस्तर की सबसे खूबसूरत तस्वीर बनकर सामने आया।
