रायपुर – छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को विकास और रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में सरकार ने एक और सकारात्मक पहल की है। मुख्यमंत्री के निर्देश और ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव के मार्गदर्शन में आत्मसमर्पित नक्सलियों के हाथों में अब हथियार की जगह हुनर और रोजगार देने की पहल शुरू की जा रही है।
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव एवं प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा के नेतृत्व में बस्तर संभाग के 7 जिलों में संचालित 8 नक्सल पुनर्वास केंद्रों में 160 हितग्राहियों को हाथकरघा उद्योग से जोड़ने के लिए नवीन बुनाई प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसके लिए कुल 54.40 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
इस परियोजना के तहत प्रत्येक पुनर्वास केंद्र में 20 हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक केंद्र के लिए 6.80 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। कांकेर के चोंगल, नारायणपुर के गरांजी, कोंडागांव के देवखरगांव, दंतेवाड़ा के लाइवलिहूड कॉलेज और आरसेटी, सुकमा के कुम्हाररास, बीजापुर तथा जगदलपुर के लाइवलिहूड कॉलेज स्थित पुनर्वास केंद्र इसके दायरे में शामिल हैं।
हथकरघा बनेगा आत्मनिर्भरता का माध्यम
बस्तर अपनी जनजातीय संस्कृति, परंपराओं, हस्तशिल्प और हाथकरघा कला के लिए देश-दुनिया में पहचान रखता है। अब इसी स्थानीय हुनर और परंपरा को आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास का माध्यम बनाया जा रहा है। प्रशिक्षण के जरिए हितग्राहियों को बुनाई का व्यावहारिक एवं रोजगारपरक कौशल प्रदान किया जाएगा, ताकि वे सम्मानजनक और नियमित आजीविका से जुड़ सकें।
प्रशिक्षण के बाद बाजार से भी जुड़ेगा रोजगार
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद हितग्राहियों को केवल प्रमाणपत्र देकर नहीं छोड़ा जाएगा। प्रशिक्षित हितग्राहियों की सहकारी समिति गठित कर उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के उत्पादन कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा।
इसके माध्यम से उन्हें बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने और उनके विपणन का अवसर मिलेगा। इससे आत्मसमर्पित नक्सलियों को नियमित रोजगार और स्थायी आय का रास्ता मिल सकेगा।
सरकार की यह पहल बस्तर में पुनर्वास की सोच को एक नई दिशा देती है—जहां मुख्यधारा में लौटे युवाओं को सिर्फ सुरक्षा और पुनर्वास नहीं, बल्कि हुनर, रोजगार, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक भविष्य देने पर जोर दिया जा रहा है।
नक्सल प्रभावित बस्तर में शांति के बाद अब रोजगार और स्वावलंबन की नई कहानी लिखने की दिशा में हाथकरघा उद्योग एक मजबूत माध्यम बनकर उभर रहा है।
