रायपुर – धार्मिक नगरी शिवरीनारायण के तेंदुआ धाम स्थित राम मिलेंगे आश्रम में स्वतंत्रता दिवस का पर्व देशभक्ति, आध्यात्मिकता और सामाजिक एकता के भाव के साथ उत्साहपूर्वक मनाया गया। आश्रम परिसर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में तिरंगा ध्वज फहराया गया। इस दौरान आश्रम से जुड़े साधक-साधिकाओं, ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर भारत माता के प्रति सम्मान और राष्ट्रप्रेम की भावना व्यक्त की।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आश्रम परिसर का वातावरण पूरी तरह देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। भगवा वस्त्रों में मौजूद साधक-साधिकाओं के हाथों में लहराते तिरंगे ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया। ध्वजारोहण के दौरान सभी ने राष्ट्रध्वज के सम्मान में अपनी सहभागिता निभाई और स्वतंत्रता सेनानियों तथा देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों को नमन किया।

आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें गांव के वरिष्ठ नागरिकों और बुजुर्गों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बुजुर्गों की मौजूदगी ने समारोह को सम्मान और संस्कार का भाव दिया। उनके अनुभव और आशीर्वाद के बीच नई पीढ़ी के लोगों एवं आश्रम से जुड़े साधकों ने राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। यह दृश्य अपने आप में पीढ़ियों के बीच जुड़ाव और भारतीय संस्कृति की खूबसूरत तस्वीर प्रस्तुत करता नजर आया।
तिरंगा फहराने से पहले और बाद में आश्रम परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना भी की गई। ध्वज स्थल को फूलों से सजाया गया था। तस्वीरों में आश्रम के साधक-साधिकाएं हाथों में छोटे-छोटे तिरंगे लेकर राष्ट्रध्वज के सामने अनुशासन और श्रद्धा के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। बच्चों की मौजूदगी ने भी कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
माता शबरी की पावन भूमि के रूप में आस्था रखने वाली धार्मिक नगरी शिवरीनारायण में आयोजित यह कार्यक्रम आध्यात्मिक वातावरण के साथ राष्ट्रभक्ति का सुंदर संगम बन गया। राम मिलेंगे आश्रम में मनाया गया स्वतंत्रता दिवस यह संदेश देता नजर आया कि देश के प्रति प्रेम और सम्मान हर वर्ग और हर पीढ़ी की साझा जिम्मेदारी है।

आश्रम परिसर में उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और देश की एकता, अखंडता, शांति एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना की। बुजुर्गों के आशीर्वाद, साधकों की सहभागिता और हाथों में लहराते तिरंगे ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।
तेंदुआ धाम स्थित राम मिलेंगे आश्रम में स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन आध्यात्मिक आस्था, भारतीय संस्कार और राष्ट्रभक्ति के त्रिवेणी संगम की सुंदर तस्वीर पेश करता नजर आया।
