कोरबा – छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर नदी-नालों और जलाशयों की चिंता बढ़ा दी है। कोरबा जिले में बारिश के बीच मिनीमाता बांगो डैम का जलस्तर 92.48 प्रतिशत तक पहुंच गया है। जलस्तर लगातार बढ़ने के बाद प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए डैम के 7 गेट खोल दिए हैं। इन गेटों से करीब 3005 क्यूसेक पानी हसदेव नदी में छोड़ा जा रहा है।
डैम से पानी छोड़े जाने के बाद हसदेव नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे बसे 35 गांवों में बाढ़ का अलर्ट जारी कर दिया है। गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को खतरे की जानकारी दी जा रही है और नदी तथा निचले इलाकों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है।
पानी बढ़ा तो गांवों पर मंडराया खतरा
बांगो डैम के गेट खुलने के बाद हसदेव नदी के आसपास प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे नदी के किनारे न जाएं और किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने कहा गया है।
अलर्ट वाले गांवों में बांगो, चर्रा, पोड़ी-उपरोड़ा, कोनकोना, लेपरा, टुनियाकछार, पाथा, गाड़ाघाट, छिनमेर, कछार, कलमीपारा, सिलीयारीपारा, जूनापारा, तिलाईडाड, डुगुपारा, टुंगुमांड़ा, छिर्रापारा, मछलीबाटा, कोरियाघाट, धनगांव, डोंगाघाट, नरमदा, औराकछार, सोनगुड़ा, जेलगांव, झाबू, नवागांव, तिलसाभाटा, लोतलोता, स्याहीमुड़ी, कोडा, हथमार, झोरा और सिरकीकला शामिल हैं।
बारिश ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता
मौसम विभाग ने भी प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है। उत्तर छत्तीसगढ़ में अगले चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना बताई गई है। 15 और 16 अगस्त को प्रदेश के एक-दो स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात की चेतावनी है। इसके बाद 17 और 18 अगस्त को भी भारी बारिश और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है।
19 अगस्त को भी भारी बारिश के साथ वज्रपात की चेतावनी है, जबकि 20 और 21 अगस्त को बारिश की संभावना बनी रहेगी, हालांकि इन दिनों के लिए कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है।
नदी से दूर रहें, चेतावनी को हल्के में न लें
बांगो डैम में जलस्तर 92 प्रतिशत से अधिक पहुंचने और लगातार बारिश के बीच 5 गेट खोलना साफ संकेत है कि हालात पर प्रशासन की पैनी नजर है। फिलहाल पानी नियंत्रित तरीके से छोड़ा जा रहा है, लेकिन बारिश का सिलसिला जारी रहने पर नदी और निचले इलाकों में खतरा बढ़ सकता है।
प्रशासन ने ग्रामीणों से नदी, नालों और निचले इलाकों से दूर रहने तथा किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। गरज-चमक और वज्रपात के दौरान लोगों को खुले स्थानों, पेड़ों के नीचे और बिजली की लाइनों के आसपास जाने से बचने तथा सुरक्षित पक्के भवन में रहने की सलाह दी गई है।
बांगो डैम का बढ़ता जलस्तर और खुलते गेट फिलहाल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती हैं। अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी सतर्कता की है—एक छोटी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है।
