रायपुर – तेंदुआ धाम स्थित राम मिलेंगे आश्रम में आज का दिन बच्चों के लिए मनोरंजन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपरा और जनजातीय विरासत को समझने का यादगार अवसर बन गया। आश्रम में गगन अवस्थी और बच्चों की मौजूदगी के बीच शिवरीनारायण में पदस्थ सब इंस्पेक्टर रितेश परमार ने बच्चों को छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक कला से जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ी गीत के माध्यम से अपनी बात रखी।
खास बात यह रही कि सब इंस्पेक्टर रितेश परमार की शिवरीनारायण में यह पहली पोस्टिंग है। पुलिस की जिम्मेदारियों के साथ स्थानीय संस्कृति और समाज को समझने की उनकी पहल ने कार्यक्रम को एक अलग ही पहचान दी। उन्होंने बच्चों के सामने छत्तीसगढ़ी लोकगीत प्रस्तुत करते हुए गीत के भाव, उसकी पृष्ठभूमि और उसमें छिपे सांस्कृतिक संदेश को सहज तरीके से समझाया।
इस दौरान जिस गीत की प्रस्तुति दी गई, वह विशेष रूप से गोंड जनजाति की संस्कृति और जीवन पर आधारित था। इस गीत को छत्तीसगढ़ की लोकप्रिय लोकगायिका ममता चंद्राकर ने अपनी आवाज दी है। परमार ने गीत सुनाने के साथ बच्चों को उसके भाव और सांस्कृतिक संदर्भ को समझाया, जिससे बच्चों के लिए यह महज एक गीत सुनने का अवसर न रहकर अपनी मिट्टी और विरासत को जानने का अनुभव बन गया।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी पूरे मनोयोग से गीत सुना। बच्चों के बीच बैठकर लोक संस्कृति की बात करना और गीत के माध्यम से उन्हें अपनी जड़ों से परिचित कराना इस आयोजन की सबसे खूबसूरत बात रही। आज के दौर में जब बच्चे आधुनिक मनोरंजन और डिजिटल दुनिया से तेजी से जुड़ रहे हैं, ऐसे प्रयास उन्हें अपनी स्थानीय भाषा, लोक कला, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आश्रम से जुड़े लोगों ने कहा कि संस्कृति केवल किताबों में पढ़ने की चीज नहीं, बल्कि उसे सुनने, समझने और महसूस करने की भी जरूरत है। परमार ने जिस सहजता से बच्चों को छत्तीसगढ़ी गीत के माध्यम से संस्कृति से परिचित कराया, वह निश्चित रूप से सराहनीय पहल है।

इस अवसर पर गगन अवस्थी सहित बच्चों और आश्रम से जुड़े लोगों ने परमार का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए भी यह अनुभव खास रहा। खासकर गीत के भाव को सुनने और समझने के बाद कई लोगों को लगा कि लोकगीतों के भीतर छिपी हमारी संस्कृति और इतिहास को समझने के लिए उन्हें नए नजरिए से सुनना जरूरी है।
राम मिलेंगे आश्रम में आयोजित यह छोटा-सा सांस्कृतिक संवाद एक बड़ा संदेश दे गया—नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने के लिए बड़े मंच नहीं, बल्कि ऐसे आत्मीय प्रयास जरूरी हैं। पुलिस अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी निभाने के साथ लोक संस्कृति को बच्चों तक पहुंचाने की परमार जी की पहल ने शिवरीनारायण में सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव की एक सुंदर मिसाल पेश की।
