अभनपुर – ग्राम पंचायत तमासिवनी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी ने शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। गणित, अंग्रेजी, भौतिकी, एनसीसी सहित कई महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होने से नाराज सैकड़ों छात्र-छात्राएं मंगलवार को भारी बारिश के बीच धरने पर बैठ गए। बच्चों का कहना है कि वर्षों से वे शिक्षक उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार आश्वासन के नाम पर उन्हें टाल दिया जाता है।

विद्यार्थियों के मुताबिक वर्ष 2017 से लगातार शिक्षकों की मांग को लेकर आवेदन और शिकायतें की जा रही हैं, बावजूद इसके स्कूल में आज तक पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हो सकी। इसका सबसे ज्यादा असर बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। परीक्षा सिर पर है, लेकिन महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होने से छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
बारिश में भी नहीं टूटा छात्रों का हौसला
शिक्षकों की मांग को लेकर छात्र-छात्राओं ने ऐसा मोर्चा खोला कि मूसलाधार बारिश भी उनके कदम नहीं रोक सकी। बड़ी संख्या में विद्यार्थी धरने पर बैठे रहे और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से लिखित आश्वासन की मांग करते रहे।
प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने विद्यार्थियों को समझाने का प्रयास किया और जल्द शिक्षकों की व्यवस्था किए जाने का मौखिक आश्वासन दिया। लेकिन इस बार विद्यार्थी केवल आश्वासन सुनकर हटने को तैयार नहीं हुए।
“मौखिक आश्वासन बहुत सुन लिया, अब लिखित गारंटी चाहिए”
धरने पर बैठे विद्यार्थियों का साफ कहना है कि हर बार अधिकारियों द्वारा मौखिक आश्वासन दिया जाता है, लेकिन समस्या जस की तस बनी रहती है। इसलिए इस बार उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित रूप में शिक्षक उपलब्ध कराने की गारंटी चाहिए।
छात्रों का सवाल भी सीधा है—जब वर्षों से स्कूल में शिक्षकों की कमी की जानकारी विभाग को है, तो अब तक व्यवस्था क्यों नहीं सुधारी गई? आखिर बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?
पालक और ग्रामीण भी छात्रों के साथ
बच्चों के आंदोलन को ग्रामीणों और पालकों का भी समर्थन मिल रहा है। उनका कहना है कि गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराना शासन और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते शिक्षकों की नियुक्ति या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो इसका सीधा नुकसान विद्यार्थियों के भविष्य को उठाना पड़ेगा।

तमासिवनी का यह प्रदर्शन सिर्फ शिक्षकों की मांग नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े बड़े सवालों का आईना है। अब देखना होगा कि बारिश में भी अपने भविष्य के लिए सड़क पर उतरने वाले इन विद्यार्थियों की आवाज प्रशासन तक कितनी मजबूती से पहुंचती है और वर्षों पुरानी इस समस्या के समाधान के लिए शिक्षा विभाग कब ठोस कदम उठाता है।
