रायपुर – छत्तीसगढ़ में करीब 7 लाख अधिकारी-कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े अहम मुद्दों पर बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में कोई निर्णय नहीं होने से कर्मचारी संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार की ओर उम्मीद लगाए बैठे कर्मचारी वर्ग को कैबिनेट से राहत की उम्मीद थी, लेकिन बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा या निर्णय नहीं होने से संगठन अब आंदोलन की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी, लंबित एरियर का भुगतान, प्रस्तावित कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करना और पदोन्नति जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सरकार इन मांगों को कैबिनेट के एजेंडे में शामिल कर कोई ठोस फैसला लेगी। हालांकि, ऐसा नहीं होने से कर्मचारियों और पेंशनरों में निराशा के साथ आक्रोश भी बढ़ता नजर आ रहा है।
‘एक मांग एक मंच’ ने सरकार को चेताया
कर्मचारी संगठनों के संयुक्त अभियान ‘एक मांग एक मंच’ से जुड़े पदाधिकारियों ने कैबिनेट बैठक के बाद सरकार के प्रति असंतोष जताया है। संगठन का कहना है कि कर्मचारी लगातार अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रखते आए हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
संगठन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि कैबिनेट बैठक से प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों को उम्मीद थी, लेकिन मांगों पर निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों के बीच सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी है।
आपात बैठकें, आंदोलन की रणनीति पर मंथन
कैबिनेट बैठक के बाद कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने आगे की रणनीति को लेकर बैठकें शुरू कर दी हैं। संगठनों की ओर से संकेत दिए गए हैं कि यदि सरकार जल्द कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं करती है, तो ज्ञापन, चरणबद्ध आंदोलन और जरूरत पड़ने पर कामबंद हड़ताल जैसे कदमों पर विचार किया जा सकता है।
फिलहाल कर्मचारी संगठनों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। यदि मांगों को लेकर जल्द कोई पहल नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में कर्मचारी आंदोलन का मुद्दा और जोर पकड़ सकता है। ऐसे में इसका असर प्रदेश के सरकारी कामकाज पर भी पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब बड़ा सवाल यही है कि करीब 7 लाख अधिकारी-कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित मांगों पर सरकार कब कोई ठोस फैसला लेती है।
