रायपुर – हीरापुर स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी डॉ. मृदुला झा पर मरीजों और कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर अब स्वास्थ्य विभाग ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद विभाग ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मिथलेश चौधरी के अनुसार, समिति शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज करेगी और इसके बाद जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी। विभाग ने एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट आने की बात कही है।
स्वास्थ्य केंद्र में सामने आए इन आरोपों ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों के साथ व्यवहार और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं। सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र आम लोगों के लिए इलाज का महत्वपूर्ण सहारा होते हैं। ऐसे में वहां पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों से संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। यदि किसी स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी पर ही दुर्व्यवहार के आरोप लगते हैं, तो शिकायतों की निष्पक्ष जांच और तथ्यों का सामने आना जरूरी हो जाता है।
चार सदस्यीय समिति करेगी जांच
मामले में CMHO डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि जांच के लिए चार लोगों की समिति गठित कर दी गई है। समिति संबंधित शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज करेगी और उनके आरोपों की पड़ताल करेगी। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ताओं के बयान लिए जाने के बाद जांच प्रक्रिया आगे बढ़ेगी तथा लगभग एक सप्ताह में रिपोर्ट आ जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के इस कदम से अब मामले की जांच और उसके निष्कर्षों पर नजर रहेगी। समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं और आगे किसी विभागीय कार्रवाई की आवश्यकता है या नहीं।
आरोपों की निष्पक्ष जांच पर टिकी निगाहें
डॉ. मृदुला झा के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में जांच समिति की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शिकायतकर्ताओं के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और संबंधित पक्षों का अभिमत सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित प्रभारी डॉक्टर का पक्ष भी दर्ज किया जाना जरूरी है, ताकि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर निष्कर्ष निकाला जा सके।
एक सप्ताह में रिपोर्ट का इंतजार
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच समिति तय समय-सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत करती है या नहीं और रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट आने की बात कही गई है। ऐसे में शिकायतकर्ताओं को अपनी बात रखने का अवसर देने के साथ-साथ जांच को पारदर्शी तरीके से पूरा करना विभाग के लिए अहम होगा।
खबर का असर अब जांच तक पहुंच गया है। चार सदस्यीय समिति के गठन और एक सप्ताह में रिपोर्ट आने के आश्वासन के बाद हीरापुर स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। अब देखना होगा कि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है या शिकायतों को लेकर कोई दूसरा तथ्य सामने आता है।
