रायपुर – छत्तीसगढ़ में रेशम उद्योग को नई दिशा देने और महिला धागाकरण समूहों को उनके उत्पाद का बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में ‘छत्तीसगढ़ रेशम सेतु’ महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है। राजधानी रायपुर में स्थापित इस सिल्क एक्सचेंज के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैयार होने वाले कोसा और टसर रेशम धागे की खरीद-बिक्री के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था विकसित की गई है। इससे महिला समूहों को अपने उत्पाद की पहचान स्थापित करने, व्यापारियों तक सीधी पहुंच बनाने और उचित मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे।
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा ने मंगलवार को रेशम सेतु का निरीक्षण किया। इस दौरान महासमुंद, धमतरी, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ सहित विभिन्न जिलों के महिला धागाकरण समूहों तथा कोसा धागा खरीदने वाले व्यापारियों के साथ बैठक कर उत्पादन, गुणवत्ता, विपणन और मूल्य निर्धारण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
महिला समूहों को मिलेगा उत्पाद का बेहतर मूल्य
बैठक में महिला समूहों ने कोसा की बढ़ती कीमतों और उसके अनुपात में रेशम धागे के विक्रय मूल्य में वृद्धि नहीं होने से उत्पन्न आर्थिक कठिनाइयों की जानकारी दी। महिलाओं ने कहा कि कच्चे माल की लागत बढ़ने के बावजूद उचित मूल्य नहीं मिलने से उनकी आय प्रभावित होती है। उन्होंने कोसा की दरों और धागाकरण से जुड़ी व्यवस्थाओं पर आवश्यक पहल करने की मांग रखी।

सचिव राजेश सिंह राणा ने समूहों की समस्याओं पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए रेशम धागे के विक्रय मूल्य में वृद्धि और कोसा की दरों को कम करने की दिशा में आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया। उन्होंने महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय स्तर पर विचार किए जाने की बात भी कही।
घर बैठे रोजगार, हर महीने 6 से 12 हजार रुपये तक आय
रेशम धागाकरण ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। चर्चा के दौरान सचिव ने महिलाओं से उनके काम और मासिक आय के बारे में जानकारी ली। समूहों की महिलाओं ने बताया कि काम की मात्रा और बाजार दर के अनुसार उन्हें भुगतान मिलता है। वर्तमान में कई महिलाएं प्रतिमाह लगभग 6,000 से 8,000 रुपये कमा रही हैं, जबकि अधिक समय देकर काम करने वाली कुछ महिलाएं 10,000 से 12,000 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
रेशम सेतु की स्थापना से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध होने के साथ ही अपने उत्पाद की गुणवत्ता और पहचान के आधार पर बेहतर कीमत हासिल करने का अवसर मिलेगा। इससे अधिक महिलाओं को धागाकरण कार्य से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
अलग-अलग ब्रांड से होगी धागे की पहचान
रेशम सेतु में विभिन्न जिलों के महिला समूहों द्वारा तैयार किए गए धागे अलग-अलग ब्रांड नामों से प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें रायगढ़ का फॉरेस्ट गोल्ड सिल्क, सरगुजा का महामाया सिल्क, जशपुर का मघेश्वर सिल्क, नारायणपुर का माड़ सिल्क, सारंगढ़ का समलेश्वरी सिल्क, महासमुंद का खल्लारी सिल्क, जांजगीर-चांपा का चांपा सिल्क, कोंडागांव का मां तेलीनसती सिल्क, जगदलपुर का दंतेश्वरी सिल्क तथा कोरबा का सृष्टि सिल्क शामिल हैं। इसके अलावा कांकेर का अरण्य सिल्क भी प्रदर्शित किया गया।
इस ब्रांड व्यवस्था से प्रत्येक समूह के उत्पाद को अलग पहचान मिलेगी। धागे की गुणवत्ता के आधार पर खरीदार अपनी जरूरत के अनुरूप उत्पाद चुन सकेंगे और समूहों को अपने उत्पाद की विशेषताओं के अनुसार मूल्य तय करने में मदद मिलेगी।
व्यापारियों को भी मिलेगा बड़ा लाभ
रेशम सेतु की व्यवस्था से अब धागा खरीदने वाले व्यापारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में जाने की परेशानी कम होगी। बैठक में शामिल रायगढ़, जांजगीर-चांपा और शक्ति सहित विभिन्न क्षेत्रों के व्यापारियों ने बताया कि पहले टसर कोसा धागा खरीदने के लिए उन्हें जगदलपुर तक जाना पड़ता था। इससे समय और परिवहन पर अतिरिक्त खर्च होता था। रायपुर में केंद्रीय खरीद-बिक्री व्यवस्था बनने से स्थानीय स्तर पर ही मांग के अनुरूप गुणवत्तायुक्त धागा प्राप्त करने में सुविधा होगी।
व्यापारियों ने अपनी आवश्यकताओं और पसंद के अनुसार विभिन्न प्रकार के रेशम धागे की मांग भी रखी। महिला समूहों ने गुणवत्ता बनाए रखते हुए मांग के अनुरूप धागा उपलब्ध कराने की सहमति दी। इससे उत्पादकों और खरीदारों के बीच सीधा संवाद तथा बेहतर व्यावसायिक समन्वय विकसित होने की उम्मीद है।
ऑनलाइन पोर्टल से जुड़ेगा रेशम कारोबार
रेशम उद्योग को आधुनिक बाजार व्यवस्था से जोड़ने के लिए सचिव राजेश सिंह राणा ने विभागीय अधिकारियों को ऑनलाइन पोर्टल तैयार कराने के निर्देश दिए। इसके माध्यम से धागा उत्पादकों और व्यापारियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की सुविधा विकसित की जा सकेगी। इससे उत्पाद, गुणवत्ता और उपलब्धता से जुड़ी जानकारी तक पहुंच आसान बनाने में मदद मिलेगी।
सचिव ने यह भी बताया कि प्रदेश में महिला समूहों द्वारा अमारी रेशम यानी अहिंसा सिल्क का उत्पादन किया जा रहा है, जिसे अमारी रेशम ब्रांड के नाम से बेचा जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ के रेशम उद्योग में विविधता और नए बाजार अवसर विकसित करने की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
महिला सशक्तीकरण और स्थानीय उद्योग को मजबूती
छत्तीसगढ़ रेशम सेतु केवल धागे की खरीद-बिक्री का केंद्र नहीं, बल्कि महिला समूहों, उत्पादकों और व्यापारियों को एक मंच पर लाने की पहल है। उचित मूल्य, बेहतर बाजार, ब्रांड पहचान और डिजिटल सुविधा पर जोर से प्रदेश के रेशम उद्योग को संगठित करने में मदद मिल सकती है।
रेशम सेतु के निरीक्षण और बैठक के दौरान महिला धागाकरण समूहों तथा व्यापारियों ने इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त की। उम्मीद है कि यह व्यवस्था महिलाओं की आय बढ़ाने, स्वरोजगार के अवसरों का विस्तार करने और छत्तीसगढ़ के रेशम उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
