छत्तीसगढ़ – राजधानी रायपुर के नगर निगम में प्रशासनिक फेरबदल के बाद जोन क्रमांक-10 के आयुक्त मोनेश्वर शर्मा को उनके वर्तमान प्रभार से हटाकर उपायुक्त, खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग, मुख्यालय में पदस्थ किया गया है। वहीं, जोन क्रमांक-10 की जिम्मेदारी अब रुचि शर्मा को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। नगर निगम के 13 अक्टूबर 2026 के आदेश में अधिकारियों की नवीन पदस्थापना और विभागीय जिम्मेदारियों में बदलाव का उल्लेख है। इस फेरबदल के बाद मोनेश्वर शर्मा की कार्यशैली और उनके पिछले कार्यकाल को लेकर सवाल फिर चर्चा में हैं।

माना से जोन-10 तक की कार्यशैली पर सवाल, अब नई जिम्मेदारी की परीक्षा
मोनेश्वर शर्मा इससे पहले माना नगर पंचायत में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) के पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं। स्थानीय स्तर पर उनके कार्यकाल को लेकर असंतोष के आरोप लगाए जाते रहे हैं। आरोप है कि उनके कार्यकाल में माना क्षेत्र के विकास कार्यों की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही और नागरिकों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ा। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित विकास कार्यों की प्रगति, स्वीकृत बजट, खर्च और लंबित परियोजनाओं के आधिकारिक आंकड़ों की जांच जरूरी है।
अब सवाल यह है कि जिस अधिकारी की कार्यशैली को लेकर असंतोष की बातें सामने आती रही हैं, उन्हें नई जिम्मेदारी मिलने के बाद विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में किस तरह का प्रदर्शन देखने को मिलेगा? खेल एवं युवा कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास जैसे विभागों का सीधा संबंध युवाओं, महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं से है। ऐसे में योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन, हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाना और प्रशासनिक जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण होगी।
दफ्तर में समय पर उपस्थिति और फोन नहीं उठाने की शिकायतें
मोनेश्वर शर्मा को लेकर स्थानीय स्तर पर यह शिकायत भी सामने रखी गई है कि वे समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते थे और आम नागरिकों को अधिकारियों से संपर्क करने में परेशानी होती थी। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, फोन नहीं उठाए जाने के कारण लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार प्रयास करना पड़ता था। पत्रकारों के फोन का जवाब नहीं मिलने की शिकायत भी की गई है।

यदि ये शिकायतें सही हैं, तो यह केवल किसी एक अधिकारी की कार्यशैली का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा सवाल है। सरकारी पद पर बैठे अधिकारी से अपेक्षा की जाती है कि वह आम जनता की समस्याएं सुने, जनप्रतिनिधियों और मीडिया के सवालों का जवाब दे तथा विकास कार्यों की नियमित समीक्षा करे। हालांकि, इन शिकायतों पर संबंधित अधिकारी का पक्ष और कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने आना भी जरूरी है।
माना के विकास पर क्या रहा असर? जवाबदेही तय करने की जरूरत
माना नगर पंचायत में करीब दो साल तक पदस्थ रहने के दौरान विकास कार्यों को लेकर असंतोष की बात कही जा रही है। स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि क्षेत्र की समस्याओं का समय पर निराकरण नहीं हुआ और विकास कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाए। यदि ऐसा हुआ है, तो यह जांच का विषय है कि इसके पीछे प्रशासनिक लापरवाही थी, बजट की कमी, तकनीकी अड़चनें या अन्य कारण।
नगर निगम के जोन क्रमांक-10 में भी आयुक्त की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। सफाई व्यवस्था, नागरिक सुविधाएं, निर्माण कार्य, शिकायतों का निराकरण और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन जोन कार्यालय की कार्यक्षमता से सीधे जुड़े हैं। ऐसे में किसी भी अधिकारी के कार्यकाल का आकलन व्यक्तिगत आरोपों से नहीं, बल्कि काम की प्रगति, शिकायतों के निपटारे और जनता को मिली सुविधाओं के आधार पर किया जाना चाहिए।
नई पदस्थापना के बाद सबसे बड़ा सवाल—कामकाज में कितना आएगा बदलाव?
13 अक्टूबर के प्रशासनिक आदेश के बाद मोनेश्वर शर्मा को नई जिम्मेदारी मिली है, जबकि जोन-10 में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि रुचि शर्मा के कार्यकाल में जोन की व्यवस्था कितनी प्रभावी होती है और नागरिकों की लंबित समस्याओं का समाधान किस गति से होता है।

दूसरी ओर, मोनेश्वर शर्मा के सामने भी नई पदस्थापना में अपनी कार्यक्षमता साबित करने की चुनौती होगी। खेल, युवा कल्याण और महिला एवं बाल विकास से संबंधित योजनाओं में परिणाम दिखाना और विभागीय कामकाज को गति देना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि प्रशासनिक फेरबदल से जनता को वास्तविक राहत मिलेगी या केवल अधिकारियों की कुर्सियां बदलने तक ही बदलाव सीमित रहेगा? इसका जवाब आने वाले समय में विभागीय कामकाज, योजनाओं की प्रगति और जनता की शिकायतों के निराकरण से ही सामने आएगा।
