रायपुर – राजधानी रायपुर में मासूम बच्चों के साथ कथित क्रूरता का एक गंभीर मामला सामने आया है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के तरुण नगर में एक मासूम बच्चे के साथ बेरहमी से मारपीट करने और उसके शरीर को सिगरेट से दागने के आरोप में पुलिस ने उसके सौतेले पिता और मां को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इस घटना में बच्चे के चेहरे, आंख और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। मामले में बच्चों के साथ हो रही हिंसा को रोकने के बजाय मां पर भी आरोपी का साथ देने और घटना छिपाने का प्रयास करने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, मामले की शिकायत सुशीला जगत, निवासी तरुण नगर, पंडरी ने मोहल्लेवासियों के साथ थाना सिविल लाइन में दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि 13 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 8:30 बजे मासूम बच्चे और उसके भाई के साथ सौतेले पिता राजा ने मारपीट और क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया। आरोप है कि मासूम को बेरहमी से पीटने के साथ सिगरेट से उसके शरीर को दागा गया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल लाइन थाना पुलिस ने अपराध क्रमांक 543/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 3(5) और किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम की धारा 75 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन और थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस ने शिकायतकर्ता तथा गवाहों से पूछताछ की। इसके बाद आरोपी राजा उर्फ सुरेश दीप और अन्नु देवी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान दोनों ने घटना को अंजाम देना स्वीकार किया। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की गई।
दोनों आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में राजा उर्फ सुरेश दीप (लगभग 35 वर्ष), पिता स्वर्गीय भीम दीप, और अन्नु देवी (लगभग 40 वर्ष), पति विशाल पासवान, दोनों निवासी तरुण नगर, पंडरी, रायपुर शामिल हैं।
बच्चों के खिलाफ हिंसा बर्दाश्त नहीं: रायपुर पुलिस
रायपुर कमिश्नरेट ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा, क्रूरता या उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला बच्चों की सुरक्षा और उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार की आवश्यकता को फिर से रेखांकित करता है। मासूम बच्चों के साथ हिंसा की आशंका होने पर परिवार, पड़ोस और समाज के लोगों की जिम्मेदारी है कि वे चुप रहने के बजाय पुलिस या संबंधित बाल संरक्षण अधिकारियों को सूचना दें, ताकि समय रहते बच्चों को सुरक्षित किया जा सके।
