गरियाबंद – छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला देवझर (अमली) से सामने आए एक कथित घटनाक्रम ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस विद्यालय में बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर होती है, वहीं उसी स्कूल के कार्यालय कक्ष में दो शिक्षक कथित रूप से शराब और चखने के साथ बैठे मिले। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार औचक निरीक्षण के दौरान स्कूल के कार्यालय कक्ष में पदस्थ शिक्षक मनोज कुमार भारद्वाज और कमल सिंह दीवान कथित रूप से बियर और शराब का सेवन करते हुए पाए गए। वीडियो में कार्यालय के भीतर कथित रूप से बियर की बोतलें और चखना भी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। इस दौरान स्कूल परिसर में कई छात्र-छात्राएं बिना पढ़ाई के मौजूद थे, जिससे यह आरोप भी सामने आया कि शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही थी।
मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह भी बताई जा रही है कि निरीक्षण के समय विद्यालय के तीन शिक्षक पहले से अवकाश पर थे, जबकि मौजूद दो शिक्षक भी कथित रूप से शिक्षण कार्य करने के बजाय नशे की हालत में पाए गए। आरोप है कि दोनों शिक्षक निर्धारित ड्रेस कोड का पालन करने के बजाय टी-शर्ट और कार्गो जींस पहनकर स्कूल पहुंचे थे, जिससे विभागीय अनुशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
घटनास्थल पर मौजूद लोगों का आरोप है कि जब मीडिया टीम और अन्य लोगों ने शिक्षकों से इस संबंध में सवाल पूछे, तो उन्होंने जवाब देने के बजाय कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि दोनों शिक्षकों ने अपशब्दों और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया तथा सवालों से बचने का प्रयास किया।
इस कथित व्यवहार का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षक ही इस तरह की गतिविधियों में लिप्त पाए जाते हैं, तो बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर पहले से उठ रहे सवालों के बीच यह मामला पूरे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, न कि इस तरह के कथित दृश्य देखने के लिए।
हालांकि इस पूरे मामले की आधिकारिक जांच शुरू कर दी गई है। मैनपुर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) देवनाथ बघेल ने कहा है कि वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में शिक्षक दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
फिलहाल यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर लोग कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग की जांच पर टिकी हैं। यदि वीडियो और लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल दो शिक्षकों की लापरवाही का मामला नहीं होगा, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और अनुशासन पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा। शिक्षा के मंदिर की गरिमा बनाए रखने और बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ रोकने के लिए इस मामले में निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।
