रायपुर – सड़क पर अचानक सामने आ जाने वाले मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने और गौवंश के साथ-साथ वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रायपुर यातायात पुलिस ने एक अनूठी पहल शुरू की है। अब रात के अंधेरे में सड़क और हाईवे पर विचरण करने वाले मवेशी दूर से ही वाहन चालकों को दिखाई देंगे। इसके लिए रेडियम कॉलर अभियान की शुरुआत की गई है।
यातायात पुलिस कमिश्नरेट रायपुर और छत्तीसगढ़ सीसीटीवी संगठन के संयुक्त प्रयास से शुरू किए गए इस अभियान के तहत यातायात पुलिस को 1000 नग रेडियम कॉलर उपलब्ध कराए गए हैं। इन कॉलर को आउटर इलाकों और प्रमुख हाईवे मार्गों पर सड़क किनारे बैठे या विचरण कर रहे मवेशियों के गले में पहनाया जाएगा।

डीसीपी ट्रैफिक ने किया रेडियम कॉलर का वितरण
मरीन ड्राइव, रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में डीसीपी ट्रैफिक डॉ. अर्चना झा ने छत्तीसगढ़ सीसीटीवी संगठन के पदाधिकारियों के साथ हाईवे पेट्रोलिंग एवं यातायात थानों के अधिकारी-कर्मचारियों को रेडियम कॉलर वितरित किए। इसके साथ ही संबंधित टीमों ने अपने-अपने क्षेत्रों में मवेशियों को चिन्हांकित कर उनके गले में रेडियम कॉलर पहनाने का काम भी शुरू कर दिया।
हेडलाइट पड़ते ही चमकेगा कॉलर, दूर से दिखेगा मवेशी
रेडियम कॉलर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वाहन की हेडलाइट पड़ते ही यह चमकने लगता है। इससे अंधेरे में सड़क पर बैठे मवेशी वाहन चालकों को काफी पहले दिखाई दे सकेंगे। चालक समय रहते वाहन की रफ्तार कम कर सकेंगे और टक्कर की आशंका को टाला जा सकेगा।

खासकर आउटर क्षेत्रों और हाईवे मार्गों पर यह अभियान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां रात के समय सड़क पर बैठे मवेशी अचानक वाहन के सामने आने से गंभीर हादसों का कारण बन जाते हैं।
सिर्फ हादसे रोकना नहीं, गौवंश की सुरक्षा भी मकसद
यातायात पुलिस का यह अभियान केवल सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य गौवंश को सड़क दुर्घटनाओं से बचाना और वाहन चालकों के लिए सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है। हाईवे पेट्रोलिंग और यातायात थानों की टीमें ऐसे स्थानों को चिन्हांकित करेंगी, जहां बड़ी संख्या में मवेशी सड़क पर नजर आते हैं। इसके बाद उन्हें रेडियम कॉलर पहनाने का अभियान लगातार जारी रहेगा।
पशु मालिकों से भी सहयोग की अपील
यातायात पुलिस ने पशु मालिकों से अपील की है कि वे अपने मवेशियों को खुले में सड़कों पर न छोड़ें और विशेषकर रात के समय उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखें। वहीं वाहन चालकों से आउटर और हाईवे मार्गों पर सावधानी बरतने, निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने और सड़क पर मवेशी दिखाई देने पर तत्काल गति नियंत्रित करने की अपील की गई है।

यातायात पुलिस की यह पहल तकनीक, संवेदनशीलता और सामुदायिक सहयोग का बेहतर उदाहरण बनकर सामने आई है। यदि अभियान को व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है, तो सड़क पर मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में कमी लाने के साथ-साथ कई अनमोल जिंदगियों और गौवंश की सुरक्षा में भी मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में एसीपी सुरेंद्र साय पैकरा, एसीपी रमेश येरेवार, एसीपी सतीश ठाकुर, थाना प्रभारी यातायात तेलीबांधा विशाल कुजूर सहित यातायात पुलिस के अधिकारी-कर्मचारी एवं छत्तीसगढ़ सीसीटीवी संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।
